Sunday, July 12, 2026

History in Hindi | इतिहास हिंदी में

July 12, 2026 0 Comments

 

History in Hindi | इतिहास हिंदी में


इतिहास का प्रयोग विशेषत :- दो अर्थों में किया जाता है। एक है प्राचीन अथवा विगत काल की घटनाएँ और दूसरा उन घटनाओं के विषय में धारणा इतिहास शब्द (इति + ह + आस ; अस् धातु, लिट् लकार अन्य पुरुष तथा एक वचन) का तात्पर्य है "यह निश्चित था"। ग्रीस के लोग इतिहास के लिए "हिस्तरी" (history) शब्द का प्रयोग करते थे। "हिस्तरी" का शाब्दिक अर्थ "बुनना" था। अनुमान होता है कि ज्ञात घटनाओं को व्यवस्थित ढंग से बुनकर ऐसा चित्र उपस्थित करने की कोशिश की जाती थी जो सार्थक और सुसंबद्ध हो। इस प्रकार इतिहास शब्द का अर्थ है - परम्परा से प्राप्त उपाख्यान समूह (जैसे कि लोक कथाएँ), वीरगाथा (जैसे कि महाभारत) या ऐतिहासिक साक्ष्य। इतिहास के अंतर्गत हम जिस विषय का अध्ययन करते हैं उसमें अब तक घटित घटनाओं या उससे संबंध रखनेवाली घटनाओं का कालक्रमानुसार वर्णन होता है। दूसरे शब्दों में मानव की विशिष्ट घटनाओं का नाम ही इतिहास है। या फिर प्राचीनता से नवीनता की ओर आने वाली, मानवजाति से संबंधित घटनाओं का वर्णन इतिहास है। इन घटनाओं व ऐतिहासिक साक्ष्यों को तथ्य के आधार पर प्रमाणित किया जाता है।

इतिहास के मुख्य आधार युगविशेष और घटनास्थल के वे अवशेष हैं जो किसी न किसी रूप में प्राप्त होते हैं। जीवन की बहुमुखी व्यापकता के कारण स्वल्प सामग्री के सहारे विगत युग अथवा समाज का चित्रनिर्माण करना दुःसाध्य है। सामग्री जितनी ही अधिक होती जाती है उसी अनुपात से बीते युग तथा समाज की रूपरेखा प्रस्तुत करना साध्य होता जाता है। पर्याप्त साधनों के होते हुए भी यह नहीं कहा जा सकता कि कल्पनामिश्रित चित्र निश्चित रूप से शुद्ध या सत्य ही होगा। इसलिए उपयुक्त कमी का ध्यान रखकर कुछ विद्वान् कहते हैं कि इतिहास की संपूर्णता असाध्य सी है, फिर भी यदि हमारा अनुभव और ज्ञान प्रचुर हो, ऐतिहासिक सामग्री की जाँच-पड़ताल को हमारी कला तर्कप्रतिष्ठत हो तथा कल्पना संयत और विकसित हो तो अतीत का हमारा चित्र अधिक मानवीय और प्रामाणिक हो सकता है। सारांश यह है कि इतिहास की रचना में पर्याप्त सामग्री, वैज्ञानिक ढंग से उसकी जाँच, उससे प्राप्त ज्ञान का महत्व समझने के विवेक के साथ ही साथ ऐतिहासक कल्पना की शक्ति तथा सजीव चित्रण की क्षमता की आवश्यकता है। स्मरण रखना चाहिए कि इतिहास न तो साधारण परिभाषा के अनुसार विज्ञान है और न केवल काल्पनिक दर्शन अथवा साहित्यिक रचना है। इन सबके यथोचित संमिश्रण से इतिहास का स्वरूप रचा जाता है।

इतिहास का आरम्भ :- 


लिखित इतिहास का आरम्भ पद्य अथवा गद्य में वीरगाथा के रूप में हुआ। फिर वीरों अथवा विशिष्ट घटनाओं के संबंध में अनुश्रुति अथवा लेखक की पूछताछ से गद्य में रचना प्रारंभ हुई। इस प्रकार के लेख खपड़ों, पत्थरों, छालों और कपड़ों पर मिलते हैं। कागज का आविष्कार होने से लेखन और पठन पाठन का मार्ग प्रशस्त हो गया। लिखित सामग्री को अन्य प्रकार की सामग्री-जैसे खंडहर, शव, बर्तन, धातु, अन्न, सिक्के, खिलौने तथा यातायात के साधनों आदि के सहयोग द्वारा ऐतिहासिक ज्ञान का क्षेत्र और कोष बढ़ता चला गया। उस सब सामग्री की जाँच पड़ताल की वैज्ञानिक कला का भी विकास होता गया। प्राप्त ज्ञान को सजीव भाषा में गुंफित करने की कला ने आश्चर्यजनक उन्नति कर ली है, फिर भी अतीत के दर्शन के लिए कल्पना कुछ तो अभ्यास, किंतु अधिकतर व्यक्ति की नैसर्गिक क्षमता एवं सूक्ष्म तथा क्रांत दृष्टि पर आश्रित है। यद्यपि इतिहास का आरंभ एशिया में हुआ, तथापि उसका विकास यूरोप में विशेष रूप से हुआ।

एशिया में चीनियों, किंतु उनसे भी अधिक इस्लामी लोगों को, जिनको कालक्रम का महत्व अच्छे प्रकार ज्ञात था, इतिहासरचना का विशेष श्रेय है। मुसलमानों के आने के पहले हिंदुओं की इतिहास संबंध में अपनी अनोखी धारणा थी। कालक्रम के बदले वे सांस्कृतिक और धार्मिक विकास या ह्रास के युगों के कुछ मूल तत्वों को एकत्रित कर और विचारों तथा भावनाओं के प्रवर्तनों और प्रतीकों का सांकेतिक वर्णन करके संतुष्ट हो जाते थे। उनका इतिहास प्राय: काव्यरूप में मिलता है जिसमें सब कच्ची-पक्की सामग्री मिली जुली, उलझी और गुथी पड़ी है। उसके सुलझाने के कुछ-कुछ प्रयत्न होने लगे हैं, किंतु कालक्रम के अभाव में भयंकर कठिनाइयाँ पड़ रही हैं।

वर्तमान सदी में यूरोपीय शिक्षा में दीक्षित हो जाने से ऐतिहासिक अनुसंधान की हिंदुस्तान में उत्तरोत्तर उन्नति होने लगी है। इतिहास की एक नहीं, सहस्रों धाराएँ हैं। स्थूल रूप से उनका प्रयोग राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में अधिक हुआ है।

भारत में इतिहास के स्रोत हैं :- ऋग्वेद और अन्‍य वेद जैसे यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद ग्रंथ, इतिहास पुराणस्मृति ग्रंथ आदि। इन्हें ऐतिहासिक सामग्री कहते हैं।
पश्चिम में हिरोडोटस को प्रथम इतिहासकार मानते हैं।

इतिहास का क्षेत्र :-

इतिहास का क्षेत्र बड़ा व्यापक है। प्रत्येक व्यक्ति, विषय, अन्वेषण आंदोलन आदि का इतिहास होता है, यहाँ तक कि इतिहास का भी इतिहास होता है। अतएव यह कहा जा सकता है कि दार्शनिक, वैज्ञानिक आदि अन्य दृष्टिकोणों की तरह ऐतिहासिक दृष्टिकोण की अपनी निजी विशेषता है। वह एक विचारशैली है जो प्रारंभिक पुरातन काल से और विशेषत: 17वीं सदी से सभ्य संसार में व्याप्त हो गई। 19वीं सदी से प्राय: प्रत्येक विषय के अध्ययन के लिए उसके विकास का ऐतिहासिक ज्ञान आवश्यक समझा जाता है। इतिहास के अध्ययन से मानव समाज के विविध क्षेत्रों का जो व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होता है उससे मनुष्य की परिस्थितियों को आँकने, व्यक्तियों के भावों और विचारों तथा जनसमूह की प्रवृत्तियों आदि को समझने के लिए बड़ी सुविधा और अच्छी खासी कसौटी मिल जाती है।

इतिहास प्राय :- नगरों, प्रांतों तथा विशेष देशों के या युगों के लिखे जाते हैं। अब इस ओर चेष्ठा और प्रयत्न होने लगे हैं कि यदि संभव हो तो सभ्य संसार ही नहीं, वरन् मनुष्य मात्र के सामूहिक विकास या विनाश का अध्ययन भूगोल के समान किया जाए। इस ध्येय की सिद्ध यद्यपि असंभव नहीं, तथापि बड़ी दुस्तर है। इसके प्राथमिक मानचित्र से यह अनुमान होता है कि विश्व के संतोषजनक इतिहास के लिए बहुत लंबे समय, प्रयास और संगठन की आवश्यकता है। कुछ विद्वानों का मत है कि यदि विश्वइतिहास की तथा मानुषिक प्रवृत्तियों के अध्ययन से कुछ सर्वव्यापी सिद्धांत निकालने की चेष्टा की गई तो इतिहास समाजशास्त्र में बदलकर अपनी वैयक्तिक विशेषता खो बैठेगा। यह भय इतना चिंताजनक नहीं है, क्योंकि समाजशास्त्र के लिए इतिहास की उतनी ही आवश्यकता है जितनी इतिहास को समाजशासत्र की। वस्तुत: इतिहास पर ही समाजशास्त्र की रचना संभव है।

सैन्य इतिहास :-

सैन्य इतिहास (Military history), मानविकी की वह विधा है जो मानव इतिहास के सशस्त्र संघर्षों का लेखा-जोखा तथा उसका समाज, संस्कृति एवं अर्थव्यवस्था आदि पर प्रभाव का अध्ययन करता है।
मुख्य लेख: सैन्य इतिहास
सैन्य इतिहास युद्ध, रणनीतियों, युद्ध, हथियार और युद्ध के मनोविज्ञान से संबंधित है। 1970 के दशक के बाद से "नए सैन्य इतिहास" जो जनशक्ति से अधिक सैनिकों के साथ, एवं रणनीति से अधिक मनोविज्ञान के साथ और समाज और संस्कृति पर युद्ध के व्यापक प्रभाव से संबंधित है।

धर्म का इतिहास :-

धर्म का इतिहास सदियों से धर्मनिरपेक्ष और धार्मिक इतिहासकारों दोनों के लिए एक मुख्य विषय रहा है, और सेमिनार और अकादमी में पढ़ाया जा रहा है। अग्रणी पत्रिकाओं में चर्च इतिहास, कैथोलिक हिस्टोरिकल रिव्यू, और धर्म का इतिहास शामिल है। विषय व्यापक रूप से राजनीतिक और सांस्कृतिक और कलात्मक आयामों से लेकर धर्मशास्त्र और मरणोत्तर गित तक फैला हुआ है। यह विषय दुनिया के सभी क्षेत्रों और जगहों में धर्मों का अध्ययन करता है जहां मनुष्य रहते हैं।

सामाजिक इतिहास :-

सामाजिक इतिहास, जिसे कभी-कभी "नए सामाजिक इतिहास" कहा जाता है, एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें सामान्य लोगों के इतिहास और जीवन के साथ सामना करने के लिए उनकी रणनीतियाँ शामिल हैं। अपने "स्वर्ण युग" 1960 और 1970 के दशक में यह विद्वानों के बीच एक प्रमुख विषय था, और अभी भी इतिहास के विभागों में इसकी अच्छी पैठ है। 1975 से 1995 तक दो दशकों में, अमेरिकी इतिहास के प्रोफेसरों का अनुपात सामाजिक इतिहास के साथ-साथ 31% से बढ़कर 41% हो गया, जबकि राजनीतिक इतिहासकारों का अनुपात 40% से 30% तक गिर गया।

सांस्कृतिक इतिहास :-

1980 और 1990 के दशक में सांस्कृतिक इतिहास ने सामाजिक इतिहास कि जगह ले ली। यह आम तौर पर नृविज्ञान और इतिहास के दृष्टिकोण को भाषा, लोकप्रिय सांस्कृतिक परंपराओं और ऐतिहासिक अनुभवों की सांस्कृतिक व्याख्याओं को देखने के लिए जोड़ती है। यह पिछले ज्ञान, रीति-रिवाजों और लोगों के समूह के कला के अभिलेखों और वर्णनात्मक विवरणों की जांच करता है। लोगों ने कैसे अतीत की अपनी स्मृति का निर्माण किया है, यह एक प्रमुख विषय है। सांस्कृतिक इतिहास में समाज में कला का अध्ययन भी शामिल है, साथ ही छवियों और मानव दृश्य उत्पादन (प्रतिरूप) का अध्ययन भी है।

राजनयिक इतिहास :-

राजनयिक इतिहास (Political history) से आशय राज्यों के बीच अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्धों के इतिहास से है। किन्तु राजनयिक इतिहास अन्तराष्ट्रीय सम्बन्ध से इस अर्थ में भिन्न है कि अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्ध के अन्तर्गत दो या दो से अधिक राज्यों के परस्पर सम्बन्धों का अध्ययन होता है जबकि राजनयिक इतिहास किसी एक राज्य की विदेश नीति से सम्बन्धित हो सकता है। राजनयिक इतिहास का झुकाव अधिकांशतः राजनय के इतिहास (history of tact) की ओर होता है जबकि अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्ध समसामयिक घटनाओं पर अधिक ध्यान देता है।

मुख्य लेख :- राजनयिक इतिहास

राजनयिक इतिहास राष्ट्रों के बीच संबंधों पर केंद्रित है, मुख्यतः कूटनीति और युद्ध के कारणों के बारे में। हाल ही में यह शांति और मानव अधिकारों के कारणों को देखता है। यह आम तौर पर विदेशी कार्यालय के दृष्टिकोण और लंबी अवधि के रणनीतिक मूल्यों को प्रस्तुत करता है, जैसा कि निरंतरता और इतिहास में परिवर्तन की प्रेरणा शक्ति है। इस प्रकार के राजनीतिक इतिहास समय के साथ देशों या राज्य सीमाओं के बीच अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के संचालन का अध्ययन है। इतिहासकार म्यूरीयल चेम्बरलेन ने लिखा है कि प्रथम विश्व युद्ध के बाद, "राजनयिक इतिहास ने ऐतिहासिक जांच के प्रमुख के रूप में संवैधानिक इतिहास का स्थान ले लिया, जोकि कभी सबसे ऐतिहासिक, सबसे सटीक और ऐतिहासिक अध्ययनों के सबसे परिष्कृत था"। उन्होंने कहा कि 1945 के बाद, प्रवृत्ति उलट गई है, अब सामाजिक इतिहास ने इसकी जगह ले लिया है।

आर्थिक इतिहास :-

मुख्य लेख :- विश्व का आर्थिक इतिहास

यद्यपि 19वीं सदी के उत्तरार्ध से ही आर्थिक इतिहास अच्छी तरह से स्थापित है, हाल के वर्षों में शैक्षिक अध्ययन पारंपरिक इतिहास विभागों से स्थानांतरित हो कर अधिक से अधिक अर्थशास्त्र विभागों की तरफ चला गया है। व्यावसायिक इतिहास व्यक्तिगत व्यापार संगठनों, व्यावसायिक तरीकों, सरकारी विनियमन, श्रमिक संबंधों और समाज पर प्रभाव के इतिहास से संबंधित है। इसमें व्यक्तिगत कंपनियों, अधिकारियों और उद्यमियों की जीवनी भी शामिल है यह आर्थिक इतिहास से संबंधित है; व्यावसायिक इतिहास को अक्सर बिजनेस स्कूलों में पढ़ाया जाता है

पर्यावरण इतिहास :-

पर्यावरण का इतिहास एक नया क्षेत्र है जो 1980 के दशक में पर्यावरण के इतिहास विशेष रूप से लंबे समय में और उस पर मानवीय गतिविधियों का प्रभाव को देखने के लिए उभरा।

विश्व इतिहास :-

मुख्य लेख :- विश्व का इतिहास

विश्व इतिहास पिछले 3000 वर्षों के दौरान प्रमुख सभ्यताओं का अध्ययन है। विश्व इतिहास मुख्य रूप से एक अनुसंधान क्षेत्र की बजाय एक शिक्षण क्षेत्र है। इसे 1980 के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और अन्य देशों में लोकप्रियता हासिल हुई थी, जिससे कि छात्रों को बढ़ते हुए वैश्वीकरण के परिवेश में दुनिया के लिए व्यापक ज्ञान की आवश्यक होगी।


विश्व के इतिहास से आशय अतीत से लेकर आजतक पृथ्वी के सभी स्थानों की मानवजाति के इतिहास से है।

  • पाषाण युग 70000-3300 ई.पू.
  • कांस्य युग
  • नवपाषाण युग
  • सिन्धु घाटी की सभ्यता 3300 ई.पू. - 1700 ई.पू.
  • मिस्र की सभ्यता (3100 ई.पू - )
  • चीन की सभ्यता
  • वैदिक काल 1500-500 ई.पू.
  • लौह युग 1200-300 ई.पू.
  • बौद्ध धर्म (५वीं शताब्दी ई.पू. - )
  • रोमन साम्राज्य 27 ई.पू.- 476 (पश्चिम)
  • ईसाई धर्म 1 -
  • इस्लाम 610
  • मंगोल साम्राज्य 1206 - 1370
  • मैग्ना कार्टा 1215
  • काली मौत 1348 - 1350
  • तुर्क साम्राज्य 1299 - 1929
  • पुनर्जागरण 14वीं शताब्दी - 17वीं शताब्दी
  • अमेरिकी महाद्वीप की खोज 1492
  • स्पैनिश साम्राज्य 1516 - 1 700
  • उपनिवेशवाद 15वीं शताब्दी - 20वीं शताब्दी
  • प्रोटेस्टैंट आन्दोलन 16वीं शताब्दी
  • सप्तवर्षीय युद्ध (फ्रांस और इंग्लैड के बीच सात साल का युद्ध 1754 - 1763)
  • अमेरिका की क्रान्ति 1775 - 1783
  • फ्रांस की क्रांति 1789
  • औद्योगिक क्रांति 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तथा 19वीं शताब्दी के पूर्वार्ध
  • अमेरिका का गृहयुद्ध 1861 - 1865
  • रूस की क्रांति 1905
  • प्रथम विश्वयुद्ध 1914 - 1918
  • द्वितीय विश्वयुद्ध 1939 - 1945
  • शीतयुद्ध 1945 - 1991
  • चन्द्रमा पर मानव 1969
  • सोवियत संघ का विघटन 1991
  • दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद की समाप्ति 1994
  • वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले 9/11, 2001
  • हिंद महासागर में सुनामी 2004
  • फुकुशिमा दाइची परमाणु दुर्घटना 2011

इतिहासकार :-

मुख्य लेख :- इतिहासकार

इतिहासकार पिछली घटनाओं की जानकारी एकत्र करते हैं, इकट्ठा करते हैं, व्यवस्थित करते हैं और प्रस्तुत करते हैं। वे इस जानकारी को पुरातात्विक साक्ष्य के माध्यम से खोजते हैं, जो भूतकाल में पाचीन स्रोतों जैसे पाण्डुलिपि, शिलालेख आदि से लिये गये है और लिखे गए होते हैं। जैसे जगह के नाम, उनकी विचारधारा आवास, वयवसथा, सामाजिक संस्था, सामाजिक उत्थान और भाषा आदि।

इतिहासकारों की सूची में, इतिहासकारों को उस ऐतिहासिक काल के क्रम में सामूहीकृत किया जा सकता है, जिसमें वे लिख रहे थे, जो जरूरी नहीं कि वह अवधि, जिस अवधि में वे विशेषीकृत थे या निपुण थे क्रॉनिकल्स और एनलिस्ट, हालांकि वे सही अर्थों में इतिहासकार नहीं हैं, उन्हें भी अक्सर शामिल किया जाता है।

छद्मइतिहास :-

मुख्य लेख :- छद्मइतिहास

छद्मइतिहास उन लेखों/रचनाओं के लिये प्रयुक्त किया जाता है जिनकी सामग्री की प्रकृति 'इतिहास जैसी' होती है किन्तु वे इतिहास-लेखन की मानक विधियों से मेल नहीं खाती। इसलिये उनके द्वारा दिये गये निष्कर्ष भ्रामक एवं अविश्वसनीय बन जाते हैं। प्राय: राष्ट्रीय, राजनैतिक, सैनिक, एवं धार्मिक विषयों के सम्बन्ध में नये एवं विवादित और काल्पनिक तथ्यों पर आधारित इतिहास को छद्मइतिहास की श्रेणी में रखा जाता है।

प्रागैतिहास :-

मुख्य लेख :- प्रागैतिहासिक काल

मानव सभ्यता का इतिहास वस्तुत: मानव के विकास का इतिहास है, पर यह प्रश्न सदा विवादग्रस्त रहा है कि आदि मनव और उसकी सभ्यता का विकास कब और कहाँ हुआ। इतिहास के इसी अध्ययन को प्रागैतिहास कहते हैं। यानि इतिहास से पूर्व का इतिहास। प्रागैतिहासिक काल की मानव सभ्यता को ४ भागों में बाँटा गया है।

प्राचीनतम सभ्यताएँ :-

  • आदिम पाषाण काल
  • पूर्व पाषाण काल
  • उत्तर पाषाण काल
  • धातु काल

असभ्यता से अर्धसभ्यता, तथा अर्धसभ्यता से सभ्यता के प्रथम सोपान तक हज़ारों सालों की दूरी तय की गई होगी। लेकिन विश्व में किस समय किस तरह से ये सभ्यताएँ विकसित हुईं इसकी कोई जानकारी आज नहीं मिलती है। हाँ इतना अवश्य मालूम हो सका है कि प्राचीन विश्व की सभी सभ्यताएँ नदियों की घाटियों में ही उदित हुईं और फली फूलीं। दजला-फ़रात की घाटी में सुमेर सभ्यता, बाबिली सभ्यता, तथा असीरियन सभ्यता, नील की घाटी में प्राचीन मिस्र की सभ्यता

सम्राट अशोक (जीवनी) | Samrat Ashok Biography in Hindi

July 12, 2026 0 Comments

 

Samrat Ashok Biography in Hindi


सम्राट अशोक (जीवनी)

प्राचीन समय के सबसे प्राचीन वंश मौर्य वंश के तीसरे राज्य अशोक मौर्य विश्वप्रसिद और सबसे शक्तिशाली राजाओं में से एक थे. सम्राट मौर्य ने 269 से 232 ई.पू तक शासन किया था. मौर्य वंश का यह राजा ही एक ऐसा राजा था जिसने अखंड भारत पर राज किया था. भारत में मौर्य वंश की नींव रखने वाले इस राजा ने भारत के उत्तर में हिन्दुकुश से लेकर गोदावरी नदी तक राज्य का विस्तार किया था इसके साथ ही उनका राज्य बांग्लादेश से लेकर पश्चिम में अफगानिस्तान और ईरान तक राज्य विस्तार था. सम्राट अशोक एक महान राजा होने के साथ धार्मिक सहिष्णु भी थे. वे बौद्ध धर्म के अनुयायी थे.https://www.historyknowledgefree.com/2022/08/samrat-ashok-biography-in-hindi.html

सम्राट अशोक का जीवन परिचय :-

  • नाम :-                 सम्राट अशोक
  • जन्म और स्थान :- 304 ई. पू पाटलिपुत्र
  • शासन का समय :- 269 ई.पू से 232 ई.पू
  • पहचान :-                 महान राजा के रूप में
  • पत्नी का नाम  :-         देवी, कारुवाकी, पद्मावती, तिष्यरक्षिता
  • पिता एवं माता :- बिन्दुसार एवं शुभाद्रंगी
  • मृत्यु :-                 232 ई पु

सम्राट अशोक (ईसा पूर्व 304 से ईसा पूर्व 232) विश्वप्रसिद्ध एवं शक्तिशाली भारतीय मौर्य राजवंश के महान गड़रिया सम्राट थे। अशोक बौद्ध धर्म के सबसे प्रतापी राजा थे। सम्राट अशोक का पूरा नाम देवानांप्रिय अशोक (राजा प्रियदर्शी देवताओं का प्रिय) था। उनका राजकाल ईसा पूर्व 269 से, 232 प्राचीन भारत में था। मौर्य राजवंश के चक्रवर्ती सम्राट अशोक राज्य का मौर्य साम्राज्य उत्तर में हिन्दुकुश, तक्षशिला की श्रेणियों से लेकर दक्षिण में गोदावरी नदी, सुवर्णगिरी पहाड़ी के दक्षिण तथा मैसूर तक तथा पूर्व में बांग्लादेश, पाटलीपुत्र से पश्चिम में अफ़गानिस्तान, ईरान, बलूचिस्तान तक पहुँच गया था। सम्राट अशोक का साम्राज्य आज का सम्पूर्ण भारत, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, म्यान्मार के अधिकांश भूभाग पर था, यह विशाल साम्राज्य उस समय तक से आज तक का सबसे बड़ा भारतीय साम्राज्य रहा है। चक्रवर्ती सम्राट अशोक विश्व के सभी महान एवं शक्तिशाली सम्राटों एवं राजाओं की पंक्तियों में हमेशा शीर्ष स्थान पर ही रहे हैं। सम्राट अशोक ही भारत के सबसे शक्तिशाली एवं महान सम्राट है। सम्राट अशोक को 'चक्रवर्ती सम्राट अशोक' कहा जाता है, जिसका अर्थ है - 'सम्राटों के सम्राट', और यह स्थान भारत में केवल सम्राट अशोक को मिला है। सम्राट अशोक को अपने विस्तृत साम्राज्य से बेहतर कुशल प्रशासन तथा बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए भी जाना जाता है।


एक चीनी यात्री ह्वेन त्सांग और फ़ाहियान की (जीवनी) और उसका प्राचीन भारत का सफ़र।

July 12, 2026 0 Comments

 

एक चीनी यात्री ह्वेन त्सांग और फ़ाहियान  की (जीवनी)

एक चीनी यात्री ह्वेन त्सांग और फ़ाहियान  की (जीवनी) और उसका प्राचीन भारत का सफ़र।



(Biography) of a Chinese traveler Hiuen Tsang and Fahien and their journey to ancient India.

ह्वेन त्सांग :-

ह्वेन त्सांग (चीनी: 玄奘; pinyin: Xuán-Zàng; Wade-Giles: Hsüan-Tsang) एक प्रसिद्ध चीनी बौद्ध भिक्षु था। वह हर्षवर्द्धन के शासन काल में भारत आया था। वह भारत में 15 वर्षों तक रहा। उसने अपनी पुस्तक सी-यू-की में अपनी यात्रा तथा तत्कालीन भारत का विवरण दिया है। उसके वर्णनों से हर्षकालीन भारत की सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक तथा सांस्कृतिक अवस्था का परिचय मिलता है।

Atlantis City (अटलांटिस)

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Atlantis City

अटलांटिस

कहानी एक ऐसे द्वीप की जिसकी सभ्यता हजारों साल आगे थी। कहा जाता है कि वहा देवी देवता निवास करते थे। तो आइए आज जानते है। दुनियां के सबसे प्राचीन और रहस्यमई शहर अटलांटिस के बारे में।

आज से लगभग 2300 वर्ष पेहेले एक मशहूर ग्रीक फिलोसोफर प्लेटो ने अटलांटिस के बारे में कुछ लिखा था। उनके अनुसार ये शहर आज से तकरीबन 11300 साल पहले अस्थित्व में था और एक ही दिन में वो पूरा का पूरा शहर पानी में समा गया। ये शहर बेहद खूबसूरत उन्नत विकसित और अपने समय से कई गुना आगे चल राहा था। कहा जाता है की ये शहर इतना खूबसूरत था की लगता था की स्वर्ग जमीन पर उतर आया हो। ओर कहा जाता है की देवी देवता भी यहां निवास करते थे। ये शहर दरहसल एक द्वीप था जो चारो ओर से पानी से घिरा हुआ था।


यह के लोग आत्म निर्भर थे। ओर मुख ता खेती करते थे। ओर वो अच्छे आर्किटेक्ट भी थे जो एक से एक खूबसूरत इमारतों का निर्माण करते थे। यह इमारत काले और लाल पत्थर से बनाई जाती थी। साथ ही ये लोग सभी तरह के धातु के बारे मे भी जानते थे। ओर उनका इस्तीमल भी करते थे इसी बात से आप समज सकते है की वो कितने उन्नत थे।


कहा ये भी जाता है की यहा के लोग। ऊपर आकाश से यानी की रेडियम तारा मंडल से आज से करीबन 50000 साल पहले धरती पर आए थे। ओर वो आज के इंसानों से गई ज्यादा लंबे गोरे और खूबसूरत थे। जिनके पास कुछ चमत्कारी शक्तियां भी थी। वो मौसम और ज्वाला मुखी को भी नियंत्रित कर सकते थे । ओर उनकी ओसत उम्र 800/1000 साल की होती थीं। कहा जाता है की उनके पास एक ऐसा यंत्र भी था जिक्सी मदत से वो टाइम और स्पेस को भी नियंत्रित कर सकते थे ।

मान्यताओं के अनुसार इस भव्य शहर का निर्माण पोसायडन ने किया था । जो ग्रीक मैथोलॉजी में समुद्र के देवता माने जाते हैं। ओसायडों एक बार किसी एक बोहोत बड़े द्वीप के खोज में थे तभी उन्हें  एक द्वीप मिला जहा बोहोत खूबसूरत लोग रहते थे । वहा एक खूबसूरत महिला भी रहती थीं जिसका नाम क्लिटो था और। पोसायडन का दिल उस महिला पर आगया। ओर उन्होंने उस बंजर पड़े द्वीप में एक भव्य शहर का निर्माण कर दिया। ये शहर क्लिटो के लिऐ बनाया गया था और उसका नाम अटलांटस रखा गया।

इसके बाद पोसायडन को क्लिटो पर शक होने लगा और उसे दुनियां से दूर रखने के लिऐ पोसायडन ने क्लिटो को एक पहाड़ पे कैद करके रखा था। जिसका नाम द हिल ऑफ क्लिटो पड़ा।

आज के समय में वेगियानिको के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है की इस शहर की लोकेशन कहा हो सख्ती है।

लेखों के अनुसार ये शहर किसी बड़ी प्राकृतिक दुर्घटना का शिकार बना था जैसे की भूकंप सुनामी और ज्वाला मुखी के विस्फोट। 

ओर कुछ मान्यताएं एसी भी है की ये शहर पोसायडन के गुस्से का शिकार बना था। या उसने अपनी प्रेमिका क्लिटो को हमेशा के लिऐ अपने पास रखने के लिऐ पूरे शहर को ही पानी के अंदर समा लिया था।


आज भी दुनियां भर के आर्कियालोजिस्ट ओर खोजी इस शहर की खोज में लगे हुए है कइयों ने तो अपनी पूरी जिंदगी लगा दी इस शहर के रहस्य को उजागर करने में। कहा जाता है की आज भी ये शहर धरती के किसी कोने में या समंदर की गहराईयों में दफन है

Chernobyl Nuclear Disaster in Hindi

July 12, 2026 0 Comments

 

Chernobyl Nuclear Disaster in Hindi


हादसे की वो रात।

दिन 26 अप्रैल 1986 समय रात के 1:23 मिनट  In Field Experiment Vladimir Ilyich Lenin Nuclear Power Plant में स्थित रिऐक्टर नंबर 4 की 500 टन वजन वाली सेफ्टी कैप के परखच्चे उड़ा देती हैं।

रीएक्टर नंबर 4 में नाईट शिफ्ट कर रहे इंजिनियर सासा यूचेन के अनुसार इस न्यूक्लियर पावर प्लांट की कंक्रीट की बनी मोटी मोटी दीवारे किसी पिघले हुए रबर की तरह लटक रही थीं । 2004 में दिए गए the गार्डियन के इंटरव्यू में वो ऊस भयावह रात को याद करते हुये वो केहेते है कि वहा कोई छत नही बची थी उपर बस आकाश दिख राहा था तारो से भरा हुवा नीला आकाश रिऍक्टर से निकलने वाली रेडिएशन की नीली लेझर बिम आकाश को चीर्ते हुऐ ऊपर आसमान में जा रही थीं।


इतिहास में ऐसा पहलीबार ऐसा हुवा था कि आम लोग किसी न्यूक्लियर रिएक्टर से निकलने वाली रेडिएशन की आकाश को चीरते हुऐ लेसर बीम को अपनी खुली आखोसे देख रहे थे।
त्रासदी को छुपाने के प्रयास।

इस त्रासदी को छुपाने का हर संभव प्रयास किया गया लेकिन ये तबाही इतनी बड़े पैमाने पर हुई थीं कि इसके परिणाम और विवादो से निपटने के लिऐ जल्दीसे एक विशाल और रिस्पॉन्सिव टीम का गठन कर दिया गया। अधिकारियों ने जल्द बाजी में पूरी की पूरी आर्मी खड़ी कर डाली । जिसमे फायर फाइटर्स पायलट खान में काम करने वाले मज़दूर  और स्थानीय लोग शामिल थे।

इन लोगो का सब से पहे ला काम था न्यूक्लीयर प्लांट के आस पास पड़े रेडिएशन युक्त मलबे को साफ करना। बड़े पैमाने पर शुद्धिकरण करना , सड़के बनाना और रेडिएशन से दूषित हो चुकी हर उस चीज को नष्ट करना। जैसे कई सो इमारतें मिलो मिल फैले जंगल हजारों उपकरण मशीन यहां तक कि जानवर भी । चाहे वो घरेलू जानवर हो या जंगली। माउंट एवरेस्ट चढ़ने जैसा ये सफाई का ये विशाल अभियान अगले 3 सालो तक चलने वाला था । लेकिन इस त्रासदी के बाद चारणोबील में काम करने वाली हजारों लोगो कि जान खतरेमे पढ़ने वाली थीं । जहा पर इन में से अधिकतर वर्कर आपने अधिकारियों के सीधे आदेश पर ये जान लेवा काम करने पर मजबूर थे तो वही हजारों वर्कर्स कुछ ऐसे भी थे जो अपने देश के लिऐ खुद चलकर चारणोबायल आए थे । अपनी जिंदगी खतरें में डाल कर दुनियां का सबसे खतनार सफाई का काम करने वाले इन लोगो को नाम दिया गया था Liquidators




Wednesday, September 21, 2022

Majha Rojgar - माझा रोजगार

September 21, 2022 0 Comments

MajhaRojgar (माझा रोजगार™)


काय आहे माझा रोजगार ? - What is Majha Rojgar Site


माझा रोजगार हे एक इंटरनेट वर उपलब्ध एक साईट आहे ज्याच्या माध्यमातून आपल्याला विवीध Job's - रोजगारा संबंधीच्या Daily Update's मिळतात Notification पोस्ट आणखी बरेच काही.जसे महाराष्ट्र शासना तर्फे Maha-DBT Farmer's तसेच PoCRA च्या माध्यमातुन विविध योजना राबविल्या जातात.

परंतु आपल्याल त्या योजनांबद्दल पुरे पुर महिती नसते किंव्हा आपल्या परीयंत या योजनांबद्दल महिती पोहोचत नाही त्यामुळे शासनाच्या या योजनांचे लाभ शेतकरी बांधवांना मिळत नाहीं.

म्हणून आम्ही या समस्येचा उपाय म्हणून शेतकरी मित्रांसाठी एक मोबाइल ॲप घेऊन आलो आहोत.
ज्याच्या माध्यमातुन आपल्याल महाराष्ट्र शासना तर्फे राबविल्या जाणाऱ्या विविध योजनां बद्दल पुरे पूर महीली व महत्त्वाचे Updates मिळतील. जनेकरून कुठलाही शेतकरी या योजनांपासून वंचीत राहू नये.

व तशेच या ॲप मधे आपल्याल विवीध प्रकारचा सरकारी व खासगी नोकऱ्या संबंधीचे सुद्धा Updates मिळतील जणे करुण आपल्या मुलाबाळांना सुद्धा त्याचा लाभ होईल.

Official Website :- https://www.majharojgar.in


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Majha Rojgar - माझा रोजगार बद्दल

Latest Government Job's in India

इथे आपल्याला रोजगारा संबंधित सर्व प्रकारच्या खासगी व सरकारी नोकरी संबंधी Daily Update's मिळतील।


। प्रवेश पत्र। निकाल। महत्त्वाच्या भरती। वर्तमान भरती।


Majha Rojgar (माझा रोजगार) चे काही मुख्य Topic's


Topic's


*🔔वर्तमान भरती


*📢मेघा भरती


*📝परीक्षा


*📝प्रवेशपत्र


*📢निकाल


*📢महत्त्वाची भरती


*🚆रेल्वे भरती


*🧑‍🔧अप्रेंटीस🧑‍💻 भरती


*🏦बँक भरती


*🛡️संरक्षण सेवा


*INDIAN 🇮🇳 ARMY


*🔥अग्निपथ योजने अंतर्गत भरती


*🧑‍✈️SSC


*👮पोलिस भरती


* 🇮🇳 सरकारी योजना


* 🌾शेतकऱ्या साठीच्या योजना🌱


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Download App





Official Website :- https://www.majharojgar.in


App CODE in Android Studio


1) MainActivity.java

package com.apnajob.majharojgar;


import android.app.AlertDialog;

import android.content.Context;

import android.content.DialogInterface;

import android.graphics.Bitmap;

import android.net.ConnectivityManager;

import android.net.NetworkInfo;

import android.os.Bundle;

import android.util.Log;

import android.view.View;

import android.webkit.WebChromeClient;

import android.webkit.WebView;

import android.webkit.WebViewClient;

import android.widget.ProgressBar;


import androidx.appcompat.app.AppCompatActivity;

import androidx.swiperefreshlayout.widget.SwipeRefreshLayout;


import com.onesignal.OneSignal;


public class MainActivity extends AppCompatActivity {


    String websiteURL = "https://www.majharojgar.in/"; // sets web url

    private WebView webview;

    SwipeRefreshLayout mySwipeRefreshLayout;

    private ProgressBar progressBar;


    private static final String ONESIGNAL_APP_ID = "0f68de21-6c4d-44f0-b5f0-8caafda93a3d";


    @Override

    protected void onCreate(Bundle savedInstanceState) {

        super.onCreate(savedInstanceState);

        setContentView(R.layout.activity_main);


        // Enable verbose OneSignal logging to debug issues if needed.

        OneSignal.setLogLevel(OneSignal.LOG_LEVEL.VERBOSE, OneSignal.LOG_LEVEL.NONE);


        // OneSignal Initialization

        OneSignal.initWithContext(this);

        OneSignal.setAppId(ONESIGNAL_APP_ID);


        // promptForPushNotifications will show the native Android notification permission prompt.

        // We recommend removing the following code and instead using an In-App Message to prompt for notification permission (See step 7)

        OneSignal.promptForPushNotifications();


        if( ! CheckNetwork.isInternetAvailable(this)) //returns true if internet available

        {

            //if there is no internet do this

            setContentView(R.layout.activity_main);

            //Toast.makeText(this,"No Internet Connection, Chris",Toast.LENGTH_LONG).show();


            new AlertDialog.Builder(this) //alert the person knowing they are about to close

                    .setTitle("No internet connection available")

                    .setMessage("Please Check you're Mobile data or Wifi network.")

                    .setPositiveButton("Ok", new DialogInterface.OnClickListener() {

                        @Override

                        public void onClick(DialogInterface dialog, int which) {

                            finish();

                        }

                    })

                    //.setNegativeButton("No", null)

                    .show();


        }

        else

        {

            //Webview stuff

            webview = findViewById(R.id.webView);

            webview.getSettings().setJavaScriptEnabled(true);

            webview.getSettings().setDomStorageEnabled(true);

            webview.setOverScrollMode(WebView.OVER_SCROLL_NEVER);

            webview.loadUrl(websiteURL);

            webview.setWebViewClient(new WebViewClientDemo());

            webview.setWebChromeClient(new WebChromeClientDemo());


        }


        //Swipe to refresh functionality

        mySwipeRefreshLayout = (SwipeRefreshLayout)this.findViewById(R.id.swipeContainer);


        mySwipeRefreshLayout.setOnRefreshListener(

                new SwipeRefreshLayout.OnRefreshListener() {

                    @Override

                    public void onRefresh() {

                        webview.reload();

                    }

                }

        );


        //Progress bar

        progressBar = (ProgressBar) findViewById(R.id.progressBar);

        progressBar.setMax(100);

    }



    private class WebViewClientDemo extends WebViewClient {

        @Override

        public boolean shouldOverrideUrlLoading(WebView view, String url) {

            view.loadUrl(url);

            return true;

        }

        @Override

        public void onPageFinished(WebView view, String url) {

            super.onPageFinished(view, url);

            progressBar.setVisibility(View.GONE);

            progressBar.setProgress(100);

            mySwipeRefreshLayout.setRefreshing(false);

        }

        @Override

        public void onPageStarted(WebView view, String url, Bitmap favicon) {

            super.onPageStarted(view, url, favicon);

            progressBar.setVisibility(View.VISIBLE);

            progressBar.setProgress(0);

        }


    }

    private class WebChromeClientDemo extends WebChromeClient {

        public void onProgressChanged(WebView view, int progress) {

            progressBar.setProgress(progress);

        }

    }


    //set back button functionality

    @Override

    public void onBackPressed() { //if user presses the back button do this

        if (webview.isFocused() && webview.canGoBack()) { //check if in webview and the user can go back

            webview.goBack(); //go back in webview

        } else { //do this if the webview cannot go back any further


            new AlertDialog.Builder(this) //alert the person knowing they are about to close

                    .setTitle("EXIT")

                    .setMessage("Are you sure. You want to Exit ?")

                    .setPositiveButton("Yes", new DialogInterface.OnClickListener() {

                        @Override

                        public void onClick(DialogInterface dialog, int which) {

                            finish();

                        }

                    })

                    .setNegativeButton("No", null)

                    .show();

        }

    }



}


class CheckNetwork {


    private static final String TAG = CheckNetwork.class.getSimpleName();


    public static boolean isInternetAvailable(Context context)

    {

        NetworkInfo info = (NetworkInfo) ((ConnectivityManager)

                context.getSystemService(Context.CONNECTIVITY_SERVICE)).getActiveNetworkInfo();


        if (info == null)

        {

            Log.d(TAG,"no internet connection");

            return false;

        }

        else

        {

            if(info.isConnected())

            {

                Log.d(TAG," internet connection available...");

                return true;

            }

            else

            {

                Log.d(TAG," internet connection");

                return true;

            }


        }

    }

}


2) activity_main.xml


<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>

<androidx.constraintlayout.widget.ConstraintLayout xmlns:android="http://schemas.android.com/apk/res/android"

    xmlns:app="http://schemas.android.com/apk/res-auto"

    xmlns:tools="http://schemas.android.com/tools"

    android:layout_width="match_parent"

    android:layout_height="match_parent"

    tools:context=".MainActivity">


    <androidx.swiperefreshlayout.widget.SwipeRefreshLayout

        android:id="@+id/swipeContainer"

        android:layout_width="match_parent"

        android:layout_height="match_parent">


        <WebView

            android:layout_width="fill_parent"

            android:layout_height="fill_parent"

            android:id="@+id/webView"

            android:layout_alignParentTop="true"

            android:layout_alignParentLeft="true"

            android:layout_alignParentStart="true"

            android:layout_alignParentBottom="true"

            android:layout_alignParentRight="true"

            android:layout_alignParentEnd="true"

            tools:ignore="MissingConstraints" />


    </androidx.swiperefreshlayout.widget.SwipeRefreshLayout>


    <ProgressBar

        android:id="@+id/progressBar"

        android:layout_width="55dp"

        android:layout_height="55dp"

        android:indeterminate="false"

        android:max="100"

        android:progress="20"

        android:progressTint="@color/colorAccent"

        app:layout_constraintBottom_toBottomOf="parent"

        app:layout_constraintEnd_toEndOf="parent"

        app:layout_constraintStart_toStartOf="parent"

        app:layout_constraintTop_toTopOf="parent" />


</androidx.constraintlayout.widget.ConstraintLayout>


3) AndroidMainifest.xml


<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>

<manifest xmlns:android="http://schemas.android.com/apk/res/android"

    xmlns:tools="http://schemas.android.com/tools"

    package="com.apnajob.majharojgar">


    <uses-permission android:name="android.permission.INTERNET" />

    <uses-permission android:name="android.permission.ACCESS_NETWORK_STATE" />


    <application

        android:allowBackup="true"

        android:dataExtractionRules="@xml/data_extraction_rules"

        android:fullBackupContent="@xml/backup_rules"

        android:icon="@mipmap/ic_launcher"

        android:label="@string/app_name"

        android:roundIcon="@mipmap/ic_launcher_round"

        android:supportsRtl="true"

        android:theme="@style/Theme.MajhaRojgar"

        tools:targetApi="31">

        <activity

            android:name=".MainActivity"

            android:exported="false" />

        <activity

            android:name=".SplashActivity"

            android:exported="true">

            <intent-filter>

                <action android:name="android.intent.action.MAIN" />


                <category android:name="android.intent.category.LAUNCHER" />

            </intent-filter>

        </activity>

    </application>


</manifest>


4) SplashActivity.java


package com.apnajob.majharojgar;


import androidx.appcompat.app.AppCompatActivity;



import android.content.Intent;


import android.os.Bundle;


import android.view.Window;


import android.view.WindowManager;



public class SplashActivity extends AppCompatActivity {



    @Override


    protected void onCreate(Bundle savedInstanceState) {


        super.onCreate(savedInstanceState);



        Window window = getWindow() ;



        window.addFlags(WindowManager.LayoutParams.FLAG_FULLSCREEN);


        setContentView(R.layout.activity_splash);





        Thread splashTread = new Thread(){



            @Override


            public void run() {


                try {


                    sleep(3000);


                    startActivity(new Intent(getApplicationContext(),MainActivity.class));


                    finish();


                } catch (InterruptedException e) {


                    e.printStackTrace();


                }



                super.run();


            }


        };



        splashTread.start();






    }



}


5) activity_splash.xml


<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>


<LinearLayout xmlns:android="http://schemas.android.com/apk/res/android"


    xmlns:app="http://schemas.android.com/apk/res-auto"


    xmlns:tools="http://schemas.android.com/tools"


    android:layout_width="match_parent"


    android:layout_height="match_parent"


    android:orientation="vertical"


    tools:context=".SplashActivity">



    <ImageView


        android:layout_width="match_parent"


        android:layout_height="300dp"


        android:src="@drawable/logo"


        android:scaleType="centerCrop"


        android:padding="50dp"


        android:layout_marginTop="220dp"/>


    <ProgressBar


        android:layout_width="220dp"


        android:layout_height="10dp"


        android:layout_gravity="center_horizontal"


        style="?android:attr/progressBarStyleHorizontal"


        android:max="100"


        android:indeterminate="true"


        android:progress="0"


        android:layout_marginTop="100dp"



        />




</LinearLayout>


6) Gradle Scripts


build.gradle(app)

CODE :-


plugins {

    id 'com.android.application'

    id 'com.google.gms.google-services'

    id 'com.onesignal.androidsdk.onesignal-gradle-plugin'

}


android {

    compileSdk 32


    defaultConfig {

        applicationId "com.apnajob.majharojgar"

        minSdk 21

        targetSdk 32

        versionCode 2

        versionName "2.2"


        testInstrumentationRunner "androidx.test.runner.AndroidJUnitRunner"

    }


    buildTypes {

        release {

            minifyEnabled false

            proguardFiles getDefaultProguardFile('proguard-android-optimize.txt'), 'proguard-rules.pro'

        }

    }

    compileOptions {

        sourceCompatibility JavaVersion.VERSION_1_8

        targetCompatibility JavaVersion.VERSION_1_8

    }

}


dependencies {


    implementation 'androidx.appcompat:appcompat:1.5.0'

    implementation 'com.google.android.material:material:1.6.1'

    implementation 'androidx.constraintlayout:constraintlayout:2.1.4'

    implementation 'androidx.swiperefreshlayout:swiperefreshlayout:1.1.0'

    implementation 'com.google.firebase:firebase-messaging:23.0.7'

    testImplementation 'junit:junit:4.13.2'

    androidTestImplementation 'androidx.test.ext:junit:1.1.3'

    androidTestImplementation 'androidx.test.espresso:espresso-core:3.4.0'


    implementation 'com.onesignal:OneSignal:[4.0.0, 4.99.99]'

}



7) settings.gradle(Majha Rojgar)


pluginManagement {

    repositories {

        gradlePluginPortal()

        google()

        mavenCentral()

        jcenter()

    }

}

dependencyResolutionManagement {

    repositoriesMode.set(RepositoriesMode.FAIL_ON_PROJECT_REPOS)

    repositories {

        google()

        mavenCentral()

        jcenter()

    }

}

rootProject.name = "Majha Rojgar"

include ':app'



Saturday, October 30, 2021

Interesting Facts About Burj Khalifa । बुर्ज खलीफा के बारे में कुछ रोचक तथ्य।

October 30, 2021 0 Comments

Interesting Facts About Burj Khalifa

बुर्ज खलीफा के बारे में कुछ रोचक तथ्य।


Dubai में बनायी गयी burj khalifa इस दुनिया में इंसान द्वारा बनाई गयी सबसे ऊँची इमारत है। ये इमारत Engineering के इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। इस इमारत को बनाने के लिए बहुत ही हिम्मत और साहस की जरूरत थी आप लोग सोच सकते है कि इतनी ऊँचाई पर Engineers और मजदूरों ने कैसे काम किया होगा?
तो चलिए आज Burj Khalifa के बारे में कुछ रोचक तथ्य जान लेते हैं जो शायद आपको नहीं पता हो।

बुर्ज खलीफा के बारे में कुछ रोचक तथ्य।


1. दुनिया की सबसे ऊँची ईमारत बुर्ज खलीफा (Burj Khalifa) जो कि दुबई (Dubai) में स्थित है इस इमारत की height 828 मीटर (2,716.5 फ़ीट) है जो की आइफिल टावर (Eiffel tower) की तुलना से करीब तीन गुणा अधिक है |


2 . एक अनुमान के अनुसार बुर्ज खलीफा को बनाने में लगभग $1.5 billion खर्च हुआ है।


3 . बुर्ज खलीफा में कुल 163 मंजिल है जिसमे 58 लिफ्ट (lifts) है और 2957 पार्किंग स्पेस (parking space), 304 होटल (hotels) 37 ऑफिस फ्लोर (Office floor) और 900 apartments है।


4 . क्या आप जानते है बुर्ज खलीफा को पहले बुर्ज दुबई कहा जाता था| बाद में यहाँ के राष्ट्रपति खलीफा बिन ज़ायेद अल नह्यान (Khalifa bin Zayed Al Nahyan)के सम्मान में इसका नाम बुर्ज खलीफा रख दिया गया।


5 . बुर्ज खलीफा के मालिक ईमार ने इसका प्रस्ताव 2003 में रखा था जिसका काम 2004 में शुरू कर दिया गया था! 2010 में ये इमारत बन के तैयार हो गयी थी और इसे लोगों के लिए शुरु कर दिया गया था।


6 . बुर्ज खलीफा के बनने के समय करीबन 12,000 मजदूर दिन-रात काम करते थे जो कि अलग अलग देशो और अलग अलग जगहों से आये थे! ये लोग इतनी ऊँची इमारत पर बिना घबराए काम करते थे।


7 . इस इमारत को बनाने में 100,000 हाथियों के बराबर कंक्रीट और पांच A380 हवाई जहाज के बराबर एल्युमीनियम (aluminium) का प्रयोग हुआ है।


8 . बुर्ज खलीफा में एक समय में लगभग 35,000 लोगो के रहने की व्यवस्था है।


9 . बुर्ज खलीफा (Burj Khalifa) की Building इतनी ऊँची है की आप इसे 95 किलोमीटर दूर से भी देख सकते है! यहाँ तक की इसकी चोटी से पडोसी देश ईरान(Iran) को भी देखा जा सकता है।



10 . बुर्ज खलीफा में जमीन से लगभग 210 मीटर की ऊँचाई पर 25 मीटर की चौड़ाई का हेलिपैड भी बनाया गया है जिस पर हेलीकाप्टर उतारा जाता है।


11 . हर दिन इस विशाल इमारत में लगभग 946,000 लीटर पानी को 100 किलोमीटर पाइप की सहायता से पहुंचाया जाता है।


12 . बुर्ज खलीफा की 76वी मंजिल पर सबसे ऊँचा स्विमिंग पूल है और 122वी मंजिल पर रेस्टॉरेंट भी है।


13 . बुर्ज खलीफा के नाम 6 world records है जिसमे सबसे ऊँची building, सबसे ऊँची लिफ्ट और सबसे ज्यादा मंजिल आदि शामिल है।


14 . बुर्ज खलीफा की इमारत इतनी ऊँची है की इसके 80 मंजिल के ऊपर रहने वालो को रमजान के दिनों में ज्यादा देर भूखा रहना पड़ता है क्योंकि ऊपर सूरज ज्यादा देर तक दिखता है।


15 . क्या आप जानते है बुर्ज खलीफा  में लगे AC से एक वर्ष में जितना पानी निकलता है उससे ओलम्पिक के पांच स्विमिंग पूल (swimming pool) भरे जा सकते है।


16 . बुर्ज खलीफा (Burj Khalifa) चारो तरफ से कृतिम झील से घिरा हुआ है जो इसकी खूबसूरती को चार – चाँद लगा देता है।


17. दुबई में बहुत तेज़ हवाए चलती है जो ऊँची इमारतो को नुक्सान पहुंचा सकती है तो इस इमारत में सुरक्षा के बहुत अच्छे प्रबंध किये गये है जैसे हवा के दवाव को झेलने के लिए सयंत्र, जब हवा का दवाव बढ़ जाए उसके लिए अलार्म सिस्टम (alarm system) आदि।


कुछ और Interesting Fact About Burj Khalifa


1#. दुनिया की सबसे बड़ी इमारत बुर्ज खलीफा को बनाने के लिए 12000 मजदूरों ने दिन रात काम करके इस प्रोजेक्ट को तैयार करा था ।


2#. बुर्ज खलीफा को बनाने के लिए 6 वर्ष का समय और 8 अरब डॉलर की लागत लगी थी।


3#. बुर्ज खलीफा इमारत की ऊंचाई 824 मीटर ऊंची और 164 मंजिला दुनिया की सबसे ऊंची इमारत है।


4#. बुर्ज खलीफा को बनने में 6 वर्ष का समय लगा और उसके बाद 4 जनवरी 2009 को इस का भव्य उद्घाटन समारोह के साथ किया गया।


5#. बुर्ज खलीफा के 76 मंजिल पर मस्जिद बनाई हुई है।


6#. बुर्ज खलीफा के भीतर 58 लिफ्ट है और 2957 गाड़ियों के पार्किंग की जगह भी उपलब्ध है इसके साथ इसमें 304 होटल और लगभग 900 अपार्टमेंट है।


7#. बुर्ज खलीफा को पहले बुर्ज दुबई कहा जाता था बाद में दुबई के राष्ट्रपति बिन ज़ायेद अल नह्यान के सम्मान में इसका नाम बुर्ज खलीफा रख दिया गया।


8#. बुर्ज खलीफा के निर्माण में 1,10,000 टन से ज्याद कंक्रीट, 55,000 टन से ज्यादा स्टील रेबर लगा है।


9#. इस इमारत की ऊंचाई इतनी है कि इस 16 किलोमीटर दूर से देखा जा सकता है।


10# इस इमारत की ऊंचाई इतनी है कि इसके सबसे ऊपरी मंजिल पर सबसे निचले मंजिल के मुकाबले 10 डिग्री सेल्सियस तापमान अधिक रहता है।



11#. इस इमारत की लिफ्ट 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है और इमारत के 124वें तल पर स्थित अवलोकन डेक ‘एट द टॉप’ तक मात्र दो मिनट में पहुंच जाती है ।


12#. इमारत के 76वें तल पर दुनिया का सबसे ऊंचा स्वीमिंग पूल और 158वें मंजिल पर स्थित है।


13#. खलीफा में जमीन से 210 मीटर की ऊचाई पर 25 मीटर की चौड़ाई का हेलिपैड भी बनाया गया है जिस पर हेलीकाप्टर उतारा जाता है ।


14#. बुर्ज खलीफा के मालिक Emaar ने इसका प्रस्ताव 2003 में रखा था जिसका काम 2004 में शुरू कर दिया गया था।


15#. बुर्ज खलीफा में एक साथ 35000 लोगों को रहने की व्यवस्था है ।


16#. बुर्ज खलीफा चारों तरफ से एक कृतिम झील से गिरा हुआ है जो इसकी खूबसूरती में और चार चांद लगा देता है।


17#. फ्रांस के दो जंपर ने बुर्ज खलीफा के ऊपर से छलांग लगाने का रिकॉर्ड अपने नाम करा है।


18#. बुर्ज खलीफा को साउथ कोरिया की सैमसंग इंजीनियरिंग कंस्ट्रक्शन ने बनाया जो इससे पहले भी कहीं मशहूर इमारतों के लिए काम कर चुकी है।


19#. बुर्ज खलीफा का स्ट्रक्चर यानी इसकी संरचना एंड स्मिथ नाम के व्यक्ति ने तैयार करी थी।


20#. भारत के राज्य केरला के george v nereparambil  जिन्होंने बुर्ज खलीफा में फ्लैट खरीद रखे हैं।


21#. आपको जानकारी हेरनी होगी  वेबसाइट www.burjkhalifa.ae के मुताबिक, टॉवर के लिए जल आपूर्ति विभाग दिन भर में औतसन 9,46,000 लीटर पानी की आपूर्ति करता है ।


तो यही थी वो कुछ Interesting और Amazing Facts About Burj Khalifa, के बारेमे ।


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The Unsolved Mestry of Titanic in Hindi

October 30, 2021 0 Comments

The  Unsolved Mestry of Titanic in Hindi.


RMS टाइटैनिक दुनिया का सबसे बड़ा वाष्प आधारित यात्री जहाज था। वह साउथम्पटन (इंग्लैंड) से अपनी प्रथम यात्रा पर, 10 अप्रैल 1912 को रवाना हुआ। चार दिन की यात्रा के बाद, 14 अप्रैल 1912 को वह एक हिमशिला से टकरा कर डूब गया जिसमें 1,517 लोगों की मृत्यु हुई जो इतिहास की सबसे बड़ी शांतिकाल समुद्री आपदाओं में से एक है।



10 अप्रैल 1912 इंग्लैंड के सौथामपटों (southampton) बंदरगाह से न्यूयॉर्क के लिए उसवक़्त का ऐक सबसे बड़ा और आलिशान जहाज अपने पहले सफर पर निकला जिसका नाम था आरएमएस टाइटैनिक ईसे देखकर कोई भी नहीं सोच सकता था की ये इसका पहला और आखिरी सफर होगा आज हम इसी के बारे मे बात करने वाले है...की ऐक येसा जहाज जिसे The unsicabal कहा जाता था आखिर उसके डूबने का क्या कारण था तो चलिये जानते हैं।टाइटैनिक जहाज़ के इतिहास के बारे में।


News Hedline.। 


4 दिन यात्रा के बाद यानि 14 अप्रैल 1912 की रात 11 बजकर 40 मिनट पर ये घोषणा हुई कि टाइटैनिक एक भीषण हादसे का शिकार हो गया है और इस घोषणा के के करीब 3 घंटे बाद 15 अप्रैल की सुबह 2:20 पर ये जहाज अटलांटिक महासागर के ठन्डे और बर्फीले सतह के निचे पूरी तरह से गायब हो गया और टाइटैनिक जहाज़ अकेला ही नहीं डूबा बल्कि अपने साथ 1500 से भी ज्यादा ज़िंदगी को ले डूबा

हादसे का कारण टाइटैनिक का एक बड़े हिमखंड से टक्कर होना बताया गया जिसके बाद इस जहाज़ में एक बड़ा छेद हो गया जिस कारण टाइटैनिक जहाज़ में पानी भर गया और वो डूब गया


The Mystery of Titanic in Hindi । The Unsinkable Ship Story in hindi।


लेकिन आपको जानकार हैरानी होगी की जब टाइटैनिक का निर्माण किया गया था तो ये दावा किया गया था की ये एक अनसिंकेबल शिप यानि कभी का टूटने वाला जहाज़ है टाइटैनिक उस समय सबसे अनुभवी इंजीनयरों द्वारा बनाया गया था और इसके निर्माण में उस समय की सबसे उन्नत और प्रभावी तकनीक का इस्तेमाल किया गया था तो अपने पहले ही सफर में टाइटैनिक के हिमखंड से टूटने की बात में कितनी सच्चाई है चलिये जानते हैं।

शोधकर्ताओ की बात को देखा जाये तो वो सभी आजतक टाइटैनिक जहाज के डूबने की बात को आजतक नकारते आये है, 46000 टन वजन, 882 फ़ीट लम्बाई, 92 फ़ीट चोराई और 175 फ़ीट उचाई वाला टाइटैनिक अपने समय का सबसे विशाल समुद्री जहाज़ था इसकी विशालता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते है की 882 फीट लंबाई वाले जहाज़ को अगर सीधा खड़ा कर दिया जाये तो यह अपने समय की हर इमारत से ऊंचा होता।

निर्माण और बनावट :-


आकार में ये जहाज़ 3 फुटबॉल मैदान से भी बड़ा हुआ करता था 20 मंज़िल उचाई जितने ऊंचे टाइटैनिक जहाज़ का निर्माण बहुत ही जोखिम भरा था इसके निर्माण के दौरान 8 मजदूर गिरकर मारे गए जबकि 246 मजदूर घायल हो गए
टाइटैनिक जहाज़ को बनाने का काम 31 मार्च 1909 में 3000 लोगो की टीम द्वारा शुरू किया गया और सिर्फ 26 महीनो यानि 31 मार्च 1911 तक इसे पूरा बना दिया गया लेकिन इसकी चिमनिया लगाने और डेकोरेशन का काम 1912 तक चलता रहा
उस समय टाइटैनिक के निर्माण की लागत 7.5 मिलियन डॉलर आयी थी लेकिन आज की मुद्रा स्तिथी के हिसाब से इस विशालकाय जहाज को बनाने की लागत 400 बिलियन डॉलर यानि की 26000 करोड़ रूपए के आसपास आती है इतनी बड़ी लागत और उस समय की सबसे बेहतरीन तकनीक और सबसे बेस्ट मटेरियल से बने टाइटैनिक का महज़ एक बर्फीली चट्टान से टकराकर 2 टुकड़ों में टूट जाना सच में एक अविश्वनीय घटना है और इसी सच्चाई से पर्दा हटाने के लिए शोधकर्ताओ ने कई विशेष कारणों से पर्दा हटाया है।

वे सारे नाम जो टाइटैनिक बनाने में शामिल हुए :-

टाइटैनिक के डिजाइनरों में Lord Pirrie का नाम प्रमुख है. वह Harland & Wolff और White Star के संचालक थे. नौसेना आर्किटेक्ट Thomas Andrews इसी कंपनी में निर्माण प्रबंधक और डिजाइन विभाग के प्रमुख थे. फिर नाम आता है Alexander Carlisle का जो कि शिपयार्ड के प्रमुख रचनाकार और जनरल मैनेजर थे. Alexander Carlisle की ही जिम्मेदारी थी कि वह जहाज में विलासिता से भरी साज-सज्जा कराएं, जरूरी उपकरण, व्यवस्था और Lifeboat रखें. 

टाइटैनिक का निर्माण :-


टाइटैनिक का निर्माण 31 मार्च 1909 को American J.P. Morgan और International Mercantile Marine Co. की लागत से शुरू हुआ. 
इसके पतवारों को 31 मई 1911 को जल में उतारा गया और तैयारी होने लगी कि अगले साल इसकी यात्रा शुरू कर दी जाए. 
टाइटैनिक की कुल लम्बाई 882 फीट और 9 इंच (269.1 मीटर), इसके ढालों की चौड़ाई 92 फीट (28.0 मीटर), भार 46,328 टन (GRT) और पानी के स्तर से डेक तक की ऊंचाई 59 फीट (18 मीटर) थी. जहाज में दो पारस्परिक जुड़े हुए चार सिलेंडर, triple-expansion steam engines और एक कम दबाव Parsons turbine (जो प्रोपेलर को घुमाते थे) था. 
इसमें 29 boiler थे जो 159 कोयला संचालित भट्टियो से जुड़े हुए थे और जहाज को 23 समुद्री मील (43 km/h, 26 mph) की तेज गति प्रदान करते थे. 62 फीट (19 मी) की उचाई की चार में से केवल तीन funnel काम करती थीं और चौथी funnel, वेंटिलेशन के लिए थी. इसके साथ ही यह जहाज को अधिक सजावटी और आकर्षक भी बनाती थीं. जहाज की कुल क्षमता यात्रियों और चालक दल के साथ 3549 थी.

The Mystary of Titanic :-


जब टाइटैनिक अपने पहले और आखिरी सफर पर निकला था उसी समय एक पत्रकार ने एक फोटो ली थी जिसे देखकर साफ़ साफ़ पता चलता है कि जहाज़ के नीचे एक काला निशान था हलाकि की उस समय इस बात पर ध्यान नहीं दिया गया लेकिन हादसे के बाद जब शोधकर्ताओ ने खोजबीन शुरू की तो पता चला कि टाइटैनिक के रवाना होने से पहले ही टाइटैनिक में रखे कोयले में आग लग गई थी।

कमाल की बात ये है की ये आग लगभग 3 हफ्ते से जल रही थी और इसपर किसी की नजर ही नहीं गयी और इतना तो हम सभी जानते है कि लोहा गर्म होने पर लाल और कमजोर हो जाता है आग की वजह से जहाज के निचे की तरफ का काला हिस्सा लाल हो चूका था जैसा की आप निचे दी गयी फोटो में देख सकते है

और दुर्भाग्यवश जहाज़ भी हिमखंड के ठीक उसी हिस्से में जा टकराया जो आग में जलकर कमजोर हो चुका था अगर समय रहते उस आग पर ध्यान दिया गया होता तो शायद टाइटैनिक के उस हिस्से में हिमखंड के टक्कर से छेद नहीं होता बल्कि सिर्फ एक बड़ा झटका लगकर ही रह जाता और शायद टाइटैनिक कभी नहीं डूबता
बताया जाता है कि टाइटैनिक को चलने के लिए प्रतिदिन 600 टन कोयले की आवश्यकता पड़ती थी दरअसल उस समय कोयला की खदानों में हड़ताल चल रही थी इसलिए जहाज़ में कोयले की आपूर्ति मुश्किल हो गयी थी

देखा जाये तो जहाज़ की सारी टिकटें पहले ही बुक हो चुकी थी ऐसे में जहाज़ के मालिकों ने जहा से संभव हो सके कोयला खरीदा और दूसरे जहाजों की यात्राये रद्द करवाकर भी उनमें मौजूद कोयले को भी महंगे दामों में खरीद लिया और इसी वजह से दूसरी जहाज़ के यात्रियों को भी टाइटैनिक में शिफ्ट कर दिया गया लेकिन ये उन्हें कहा पता था की ये उनका आखिरी सफर होने वाला है। 


टाइटैनिक की भव्यता और लोकप्रियता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते है की इसकी पहली यात्रा को देखने के लिए लगभग 1 लाख से भी ज्यादा लोग आये थे।

 
टाइटैनिक का इंटीरियर लंदन के गेट होटल पर आधारित था स्विमिंग पूल और जिम से लेकर टेनिस कोर्ट और म्यूजिक से जुडी सारी सुविधाओ से जुड़ा ये जहाज़ किसी तैरते हुए महल से कम नहीं था टाइटैनिक पर यात्रियों के लिए 20000 बियर और शराब की बोतले 80000 महँगे सिगार और तरह तरह के खाने की वयवस्था थी।


Miths & Mystris :-



टाइटैनिक के डूबने के पीछे का मिथ्स। ऐक कारण यह भी बताया जाता हैं।
टाइटैनिक के डूबने के पीछे दूरबीन की कमी को भी बताया गया दरअसल उन दिनों सोनार सिस्टम नहीं आया था सोनार सिस्टम में एक प्रकार की ध्वनि तरंगे लगातार छोड़ी जाती है और जब वो तरंगे किसी वस्तु से टकराकर वापस आती है तो ये सिस्टम उस वस्तु की आकार और दूरी का सही पता कुछ किलोमीटर की दूरी से ही कर लेता है
उस समय किसी मनुष्य के द्वारा ही दूरबीन की सहायता से समुद्री जहाज़ों के सामने पड़ने वाले रुकावटो पर नजर रखी जाती थी लेकिन एक दुर्भाग्यपूर्ण बात ये भी रही कि जिस कर्मचारी द्वारा दूरबीन से नजर रखी जाती थी उसे जहाज़ के रवाना होने से कुछ मिनटों पहले नौकरी से निकाल दिया गया था। 
और गलती से उस दूरबीन के लॉकर की चाबी उस कर्मचारी के पास रह गयी थी और इसीलिए नए कर्मचारी को दूरबीन नहीं मिल पाया और उसे जहाज़ के सामने आने वाली रुकावटों को अपनी नंगी आंखो से देखना पड़ा। 


यही कारण था की उसको वो हिमखंड तब नजर आया जब जहाज़ हिमखंड से महज़ 100-200 मीटर की दूरी पर ही रह गया था अगर शायद उस कर्मचारी को दूरबीन मिल गयी होती तो वो उस हिमखंड को कुछ किलोमीटर पहले ही देख सकता था तो शायद टाइटैनिक को इस दुर्घटना से बचाया जा सकता था।

हिमखंड से टकराने की कहानी :-


दरअसल अटलांटिक महासागर में ऐसे हिमखण्ड तैरते रहते है इस जहाज़ के कप्तान एडवर्ड स्मिथ को जहाज़ के रास्ते में 6 बड़े हिमखंड की चेतावनी पहले ही दे गयी थी और उनको जहाज़ के धीरे चलने के निर्देश भी दिए गए थे लेकिन शायद एडवर्ड टाइटैनिक की प्रतिस्ठा में एक और रिकॉर्ड जोड़ना चाहते थे कि टाइटैनिक को सबसे विशालकाय और सबसे तेज़ जहाज़ होने का भी दर्जा दिलवाना चाहते थे इसलिए वह हर हाल में न्यू यॉर्क जल्दी पहुंचना चाहते थे।

अगर जहाज़ की स्पीड थोड़ी कम होती तो शायद हिमखंड से टकराने के बाद जहाज़ को काबू में लाया जा सकता था पर गति ज्यादा होने के कारण जहाज़ को जल्दी मोड़ा न जा सका और जहाज़ तेजी से हिमखंड से जा टकराया
टाइटैनिक पर एक साथ 3547 लोग सफर कर सकते थे जिसमे 2687 यात्री हो सकते थे बाकि 860 जहाज़ में काम करने वाले लोग होते थे लेकिन इसकी पहली यात्रा के दौरान इसपर करीब 2228 लोग ही सफर कर रहे थे टाइटैनिक में यात्रियों की संख्या के हिसाब से लगभग 60 आपात्कालीन नाव होनी चाहिए थी लेकिन टाइटैनिक के डिजाइनर ने इससे 48 आपात्कालीन नाओ के साथ ही तैयार करने की योजना बनायीं और बाद में नावों की संख्या केवल 20 करदी थी। 


आपातकालीन नाओ को घटने की डिजाइनर से जब वजह पूछी गयी तो उन्होंने बताया कि इतनी सारी नाओ को लटकाने से टाइटैनिक की सुंदरता खराब हो रही थी और वैसे भी ये कभी न डूबने वाला जहाज़ है
अगर इसकी सुंदरता को ध्यान में न रखकर जरुरत के हिसाब से इसमें आपात्कालीन नाओ लगाया गया होता तो शायद हादसे के बाद भी आपातकालीन नाओ के जरिये सभी लोगो को सुरक्षित बचाया जा सकता था
हिमखंड से टकराने के बाद जब टाइटैनिक में छेद हुआ तो जहाज़ के कप्तान को यकीन नहीं हो रहा था की ये जहाज़ डूब जायेगा और इसीलिए पहली आपातकालीन बोट को रवाना करने में लगभग 1:30 घंटे का समय लगा दिया गया

और अजीब बात तो ये थी की इस आपातकालीन नाओ में 65 लोगो के बैठने जगह थी और केवल इसमें 27 लोग ही सवार थे क्यूंकि ये किसी को विश्वास नहीं हो रहा था कि टाइटैनिक डूब जायेगा
इतना सब कुछ होने के बावजूद भी टाइटैनिक के यात्रियों को आसानी से बचाया जा सकता था लकिन यह एक और सबसे बड़ी गलती की गयी वो ये थी की जब जहाज़ में पानी भरने लगा तो जहाज़ के कप्तान ने तब भी जहाज़ को धीमी गति से चलाना सही समझा क्युकी टाइटैनिक के हादसे की खबर सुनते ही एक दूसरे जहाज़ को मदद के लिए रवाना कर दिया गया था जोकि टाइटैनिक से महज़ 4 घंटे की दूरी पर ही था
लेकिन टाइटैनिक को दूसरे जहाज़ की तरफ धीमी गति से भी चलाना महंगा पड़ गया क्युकी जहाज़ के आगे बढ़ने से जहाज़ पानी के दवाब से और ज्यादा टकराने लगा और पानी बहुत तेजी से अंदर की तरफ घुसने लगा लेकिन जबतक कप्तान को इस गलती का एहसास हुआ तबतक अगले हिस्से में इतना पानी भर चुका था कि जहाज़ का अगला हिस्सा पानी में डूबने लगा था। 


ऐसे में सभी यात्री जहाज़ के पीछे के हिस्से की तरफ दौड़ने लगे और इसके बाद जहाज़ का आगे का हिस्सा समुन्द्र में और ज्यादा धसने लगा और जहाज़ कुछ समय के लिए बिच से खड़ा होकर बिच से टूट गया लेकिन टूटने के बाद जहाज़ का ये हिस्सा अलग नहीं हुआ अगर हो जाता तो पिछले हिस्से वाले यात्रियों को अपनी जान बचाने का थोड़ा समय और मिल जाता।
लेकिन जहाज़ का पिछला हिस्सा भी अगले हिस्से की तरह समुन्द्र में डूब गया और इसी के साथ जहाज़ की सारी ज़िंदगिया भी डूब गयी।

बताया जाता है कि टाइटैनिक अटलांटिक महासागर के जिस हिस्से में डूबा वह पानी का तापमान माइनस -2 डिग्री था जिसमे एक साधारण इंसान का 20 मिनट से ज्यादा जिंदा रहना नामुमकिन है यही कारण है की लाइफ जैकेट पहनने के बाद भी कोई यात्री ज्यादा समय तक ज़िंदा नहीं रह पाया। 


मरने वालों में ज्यादातर मर्द थे क्युकी महिलाओ को पहले ही जहाज़ से दूर भेज दिया गया था तो दोस्तों ये थी अटलांटिक महासागर में डूबे टाइटैनिक जहाज़ की असली घटना जिसका अंदाजा आप खुद लगा सकते है।
टाइटैनिक के साथ हुई इस भायक दुर्घटना के लिए आपके क्या विचार है या इस आर्टिकल में कुछ गलतियां है तो हमें कमेंट करके जरूर बताये।

जिस चट्टान से जहाज टकराया :-


जहाज अपनी यात्रा के चौथे दिन तेज गति में चलते हुए एक आइसबर्ग से टकरा गया था. एक अनुमान के मुताबिक यह बर्फीली चट्टान करीब 10,000 साल पहले ग्रीनलैंड से अलग हुई थी।


Titanic

टाइटैनिक के साथ जो कुछ भी हुआ उसके पीछे सबसे बड़ा हाथ विलासिता और अतिमहत्वकांक्षा का था. महत्वकांक्षा थी इतिहास बनाने की, इस बात की कि समुद्र में सबसे बड़ा जहाज पहली बार सबसे तेज गति से तैरा. लेकिन इतिहास इस बात पर बना कि सबसे बड़े जहाज का पहला ही सफर आखिरी हो गया.

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