Sunday, July 12, 2026

History in Hindi | इतिहास हिंदी में

July 12, 2026 0 Comments

 

History in Hindi | इतिहास हिंदी में


इतिहास का प्रयोग विशेषत :- दो अर्थों में किया जाता है। एक है प्राचीन अथवा विगत काल की घटनाएँ और दूसरा उन घटनाओं के विषय में धारणा इतिहास शब्द (इति + ह + आस ; अस् धातु, लिट् लकार अन्य पुरुष तथा एक वचन) का तात्पर्य है "यह निश्चित था"। ग्रीस के लोग इतिहास के लिए "हिस्तरी" (history) शब्द का प्रयोग करते थे। "हिस्तरी" का शाब्दिक अर्थ "बुनना" था। अनुमान होता है कि ज्ञात घटनाओं को व्यवस्थित ढंग से बुनकर ऐसा चित्र उपस्थित करने की कोशिश की जाती थी जो सार्थक और सुसंबद्ध हो। इस प्रकार इतिहास शब्द का अर्थ है - परम्परा से प्राप्त उपाख्यान समूह (जैसे कि लोक कथाएँ), वीरगाथा (जैसे कि महाभारत) या ऐतिहासिक साक्ष्य। इतिहास के अंतर्गत हम जिस विषय का अध्ययन करते हैं उसमें अब तक घटित घटनाओं या उससे संबंध रखनेवाली घटनाओं का कालक्रमानुसार वर्णन होता है। दूसरे शब्दों में मानव की विशिष्ट घटनाओं का नाम ही इतिहास है। या फिर प्राचीनता से नवीनता की ओर आने वाली, मानवजाति से संबंधित घटनाओं का वर्णन इतिहास है। इन घटनाओं व ऐतिहासिक साक्ष्यों को तथ्य के आधार पर प्रमाणित किया जाता है।

इतिहास के मुख्य आधार युगविशेष और घटनास्थल के वे अवशेष हैं जो किसी न किसी रूप में प्राप्त होते हैं। जीवन की बहुमुखी व्यापकता के कारण स्वल्प सामग्री के सहारे विगत युग अथवा समाज का चित्रनिर्माण करना दुःसाध्य है। सामग्री जितनी ही अधिक होती जाती है उसी अनुपात से बीते युग तथा समाज की रूपरेखा प्रस्तुत करना साध्य होता जाता है। पर्याप्त साधनों के होते हुए भी यह नहीं कहा जा सकता कि कल्पनामिश्रित चित्र निश्चित रूप से शुद्ध या सत्य ही होगा। इसलिए उपयुक्त कमी का ध्यान रखकर कुछ विद्वान् कहते हैं कि इतिहास की संपूर्णता असाध्य सी है, फिर भी यदि हमारा अनुभव और ज्ञान प्रचुर हो, ऐतिहासिक सामग्री की जाँच-पड़ताल को हमारी कला तर्कप्रतिष्ठत हो तथा कल्पना संयत और विकसित हो तो अतीत का हमारा चित्र अधिक मानवीय और प्रामाणिक हो सकता है। सारांश यह है कि इतिहास की रचना में पर्याप्त सामग्री, वैज्ञानिक ढंग से उसकी जाँच, उससे प्राप्त ज्ञान का महत्व समझने के विवेक के साथ ही साथ ऐतिहासक कल्पना की शक्ति तथा सजीव चित्रण की क्षमता की आवश्यकता है। स्मरण रखना चाहिए कि इतिहास न तो साधारण परिभाषा के अनुसार विज्ञान है और न केवल काल्पनिक दर्शन अथवा साहित्यिक रचना है। इन सबके यथोचित संमिश्रण से इतिहास का स्वरूप रचा जाता है।

इतिहास का आरम्भ :- 


लिखित इतिहास का आरम्भ पद्य अथवा गद्य में वीरगाथा के रूप में हुआ। फिर वीरों अथवा विशिष्ट घटनाओं के संबंध में अनुश्रुति अथवा लेखक की पूछताछ से गद्य में रचना प्रारंभ हुई। इस प्रकार के लेख खपड़ों, पत्थरों, छालों और कपड़ों पर मिलते हैं। कागज का आविष्कार होने से लेखन और पठन पाठन का मार्ग प्रशस्त हो गया। लिखित सामग्री को अन्य प्रकार की सामग्री-जैसे खंडहर, शव, बर्तन, धातु, अन्न, सिक्के, खिलौने तथा यातायात के साधनों आदि के सहयोग द्वारा ऐतिहासिक ज्ञान का क्षेत्र और कोष बढ़ता चला गया। उस सब सामग्री की जाँच पड़ताल की वैज्ञानिक कला का भी विकास होता गया। प्राप्त ज्ञान को सजीव भाषा में गुंफित करने की कला ने आश्चर्यजनक उन्नति कर ली है, फिर भी अतीत के दर्शन के लिए कल्पना कुछ तो अभ्यास, किंतु अधिकतर व्यक्ति की नैसर्गिक क्षमता एवं सूक्ष्म तथा क्रांत दृष्टि पर आश्रित है। यद्यपि इतिहास का आरंभ एशिया में हुआ, तथापि उसका विकास यूरोप में विशेष रूप से हुआ।

एशिया में चीनियों, किंतु उनसे भी अधिक इस्लामी लोगों को, जिनको कालक्रम का महत्व अच्छे प्रकार ज्ञात था, इतिहासरचना का विशेष श्रेय है। मुसलमानों के आने के पहले हिंदुओं की इतिहास संबंध में अपनी अनोखी धारणा थी। कालक्रम के बदले वे सांस्कृतिक और धार्मिक विकास या ह्रास के युगों के कुछ मूल तत्वों को एकत्रित कर और विचारों तथा भावनाओं के प्रवर्तनों और प्रतीकों का सांकेतिक वर्णन करके संतुष्ट हो जाते थे। उनका इतिहास प्राय: काव्यरूप में मिलता है जिसमें सब कच्ची-पक्की सामग्री मिली जुली, उलझी और गुथी पड़ी है। उसके सुलझाने के कुछ-कुछ प्रयत्न होने लगे हैं, किंतु कालक्रम के अभाव में भयंकर कठिनाइयाँ पड़ रही हैं।

वर्तमान सदी में यूरोपीय शिक्षा में दीक्षित हो जाने से ऐतिहासिक अनुसंधान की हिंदुस्तान में उत्तरोत्तर उन्नति होने लगी है। इतिहास की एक नहीं, सहस्रों धाराएँ हैं। स्थूल रूप से उनका प्रयोग राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में अधिक हुआ है।

भारत में इतिहास के स्रोत हैं :- ऋग्वेद और अन्‍य वेद जैसे यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद ग्रंथ, इतिहास पुराणस्मृति ग्रंथ आदि। इन्हें ऐतिहासिक सामग्री कहते हैं।
पश्चिम में हिरोडोटस को प्रथम इतिहासकार मानते हैं।

इतिहास का क्षेत्र :-

इतिहास का क्षेत्र बड़ा व्यापक है। प्रत्येक व्यक्ति, विषय, अन्वेषण आंदोलन आदि का इतिहास होता है, यहाँ तक कि इतिहास का भी इतिहास होता है। अतएव यह कहा जा सकता है कि दार्शनिक, वैज्ञानिक आदि अन्य दृष्टिकोणों की तरह ऐतिहासिक दृष्टिकोण की अपनी निजी विशेषता है। वह एक विचारशैली है जो प्रारंभिक पुरातन काल से और विशेषत: 17वीं सदी से सभ्य संसार में व्याप्त हो गई। 19वीं सदी से प्राय: प्रत्येक विषय के अध्ययन के लिए उसके विकास का ऐतिहासिक ज्ञान आवश्यक समझा जाता है। इतिहास के अध्ययन से मानव समाज के विविध क्षेत्रों का जो व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होता है उससे मनुष्य की परिस्थितियों को आँकने, व्यक्तियों के भावों और विचारों तथा जनसमूह की प्रवृत्तियों आदि को समझने के लिए बड़ी सुविधा और अच्छी खासी कसौटी मिल जाती है।

इतिहास प्राय :- नगरों, प्रांतों तथा विशेष देशों के या युगों के लिखे जाते हैं। अब इस ओर चेष्ठा और प्रयत्न होने लगे हैं कि यदि संभव हो तो सभ्य संसार ही नहीं, वरन् मनुष्य मात्र के सामूहिक विकास या विनाश का अध्ययन भूगोल के समान किया जाए। इस ध्येय की सिद्ध यद्यपि असंभव नहीं, तथापि बड़ी दुस्तर है। इसके प्राथमिक मानचित्र से यह अनुमान होता है कि विश्व के संतोषजनक इतिहास के लिए बहुत लंबे समय, प्रयास और संगठन की आवश्यकता है। कुछ विद्वानों का मत है कि यदि विश्वइतिहास की तथा मानुषिक प्रवृत्तियों के अध्ययन से कुछ सर्वव्यापी सिद्धांत निकालने की चेष्टा की गई तो इतिहास समाजशास्त्र में बदलकर अपनी वैयक्तिक विशेषता खो बैठेगा। यह भय इतना चिंताजनक नहीं है, क्योंकि समाजशास्त्र के लिए इतिहास की उतनी ही आवश्यकता है जितनी इतिहास को समाजशासत्र की। वस्तुत: इतिहास पर ही समाजशास्त्र की रचना संभव है।

सैन्य इतिहास :-

सैन्य इतिहास (Military history), मानविकी की वह विधा है जो मानव इतिहास के सशस्त्र संघर्षों का लेखा-जोखा तथा उसका समाज, संस्कृति एवं अर्थव्यवस्था आदि पर प्रभाव का अध्ययन करता है।
मुख्य लेख: सैन्य इतिहास
सैन्य इतिहास युद्ध, रणनीतियों, युद्ध, हथियार और युद्ध के मनोविज्ञान से संबंधित है। 1970 के दशक के बाद से "नए सैन्य इतिहास" जो जनशक्ति से अधिक सैनिकों के साथ, एवं रणनीति से अधिक मनोविज्ञान के साथ और समाज और संस्कृति पर युद्ध के व्यापक प्रभाव से संबंधित है।

धर्म का इतिहास :-

धर्म का इतिहास सदियों से धर्मनिरपेक्ष और धार्मिक इतिहासकारों दोनों के लिए एक मुख्य विषय रहा है, और सेमिनार और अकादमी में पढ़ाया जा रहा है। अग्रणी पत्रिकाओं में चर्च इतिहास, कैथोलिक हिस्टोरिकल रिव्यू, और धर्म का इतिहास शामिल है। विषय व्यापक रूप से राजनीतिक और सांस्कृतिक और कलात्मक आयामों से लेकर धर्मशास्त्र और मरणोत्तर गित तक फैला हुआ है। यह विषय दुनिया के सभी क्षेत्रों और जगहों में धर्मों का अध्ययन करता है जहां मनुष्य रहते हैं।

सामाजिक इतिहास :-

सामाजिक इतिहास, जिसे कभी-कभी "नए सामाजिक इतिहास" कहा जाता है, एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें सामान्य लोगों के इतिहास और जीवन के साथ सामना करने के लिए उनकी रणनीतियाँ शामिल हैं। अपने "स्वर्ण युग" 1960 और 1970 के दशक में यह विद्वानों के बीच एक प्रमुख विषय था, और अभी भी इतिहास के विभागों में इसकी अच्छी पैठ है। 1975 से 1995 तक दो दशकों में, अमेरिकी इतिहास के प्रोफेसरों का अनुपात सामाजिक इतिहास के साथ-साथ 31% से बढ़कर 41% हो गया, जबकि राजनीतिक इतिहासकारों का अनुपात 40% से 30% तक गिर गया।

सांस्कृतिक इतिहास :-

1980 और 1990 के दशक में सांस्कृतिक इतिहास ने सामाजिक इतिहास कि जगह ले ली। यह आम तौर पर नृविज्ञान और इतिहास के दृष्टिकोण को भाषा, लोकप्रिय सांस्कृतिक परंपराओं और ऐतिहासिक अनुभवों की सांस्कृतिक व्याख्याओं को देखने के लिए जोड़ती है। यह पिछले ज्ञान, रीति-रिवाजों और लोगों के समूह के कला के अभिलेखों और वर्णनात्मक विवरणों की जांच करता है। लोगों ने कैसे अतीत की अपनी स्मृति का निर्माण किया है, यह एक प्रमुख विषय है। सांस्कृतिक इतिहास में समाज में कला का अध्ययन भी शामिल है, साथ ही छवियों और मानव दृश्य उत्पादन (प्रतिरूप) का अध्ययन भी है।

राजनयिक इतिहास :-

राजनयिक इतिहास (Political history) से आशय राज्यों के बीच अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्धों के इतिहास से है। किन्तु राजनयिक इतिहास अन्तराष्ट्रीय सम्बन्ध से इस अर्थ में भिन्न है कि अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्ध के अन्तर्गत दो या दो से अधिक राज्यों के परस्पर सम्बन्धों का अध्ययन होता है जबकि राजनयिक इतिहास किसी एक राज्य की विदेश नीति से सम्बन्धित हो सकता है। राजनयिक इतिहास का झुकाव अधिकांशतः राजनय के इतिहास (history of tact) की ओर होता है जबकि अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्ध समसामयिक घटनाओं पर अधिक ध्यान देता है।

मुख्य लेख :- राजनयिक इतिहास

राजनयिक इतिहास राष्ट्रों के बीच संबंधों पर केंद्रित है, मुख्यतः कूटनीति और युद्ध के कारणों के बारे में। हाल ही में यह शांति और मानव अधिकारों के कारणों को देखता है। यह आम तौर पर विदेशी कार्यालय के दृष्टिकोण और लंबी अवधि के रणनीतिक मूल्यों को प्रस्तुत करता है, जैसा कि निरंतरता और इतिहास में परिवर्तन की प्रेरणा शक्ति है। इस प्रकार के राजनीतिक इतिहास समय के साथ देशों या राज्य सीमाओं के बीच अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के संचालन का अध्ययन है। इतिहासकार म्यूरीयल चेम्बरलेन ने लिखा है कि प्रथम विश्व युद्ध के बाद, "राजनयिक इतिहास ने ऐतिहासिक जांच के प्रमुख के रूप में संवैधानिक इतिहास का स्थान ले लिया, जोकि कभी सबसे ऐतिहासिक, सबसे सटीक और ऐतिहासिक अध्ययनों के सबसे परिष्कृत था"। उन्होंने कहा कि 1945 के बाद, प्रवृत्ति उलट गई है, अब सामाजिक इतिहास ने इसकी जगह ले लिया है।

आर्थिक इतिहास :-

मुख्य लेख :- विश्व का आर्थिक इतिहास

यद्यपि 19वीं सदी के उत्तरार्ध से ही आर्थिक इतिहास अच्छी तरह से स्थापित है, हाल के वर्षों में शैक्षिक अध्ययन पारंपरिक इतिहास विभागों से स्थानांतरित हो कर अधिक से अधिक अर्थशास्त्र विभागों की तरफ चला गया है। व्यावसायिक इतिहास व्यक्तिगत व्यापार संगठनों, व्यावसायिक तरीकों, सरकारी विनियमन, श्रमिक संबंधों और समाज पर प्रभाव के इतिहास से संबंधित है। इसमें व्यक्तिगत कंपनियों, अधिकारियों और उद्यमियों की जीवनी भी शामिल है यह आर्थिक इतिहास से संबंधित है; व्यावसायिक इतिहास को अक्सर बिजनेस स्कूलों में पढ़ाया जाता है

पर्यावरण इतिहास :-

पर्यावरण का इतिहास एक नया क्षेत्र है जो 1980 के दशक में पर्यावरण के इतिहास विशेष रूप से लंबे समय में और उस पर मानवीय गतिविधियों का प्रभाव को देखने के लिए उभरा।

विश्व इतिहास :-

मुख्य लेख :- विश्व का इतिहास

विश्व इतिहास पिछले 3000 वर्षों के दौरान प्रमुख सभ्यताओं का अध्ययन है। विश्व इतिहास मुख्य रूप से एक अनुसंधान क्षेत्र की बजाय एक शिक्षण क्षेत्र है। इसे 1980 के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और अन्य देशों में लोकप्रियता हासिल हुई थी, जिससे कि छात्रों को बढ़ते हुए वैश्वीकरण के परिवेश में दुनिया के लिए व्यापक ज्ञान की आवश्यक होगी।


विश्व के इतिहास से आशय अतीत से लेकर आजतक पृथ्वी के सभी स्थानों की मानवजाति के इतिहास से है।

  • पाषाण युग 70000-3300 ई.पू.
  • कांस्य युग
  • नवपाषाण युग
  • सिन्धु घाटी की सभ्यता 3300 ई.पू. - 1700 ई.पू.
  • मिस्र की सभ्यता (3100 ई.पू - )
  • चीन की सभ्यता
  • वैदिक काल 1500-500 ई.पू.
  • लौह युग 1200-300 ई.पू.
  • बौद्ध धर्म (५वीं शताब्दी ई.पू. - )
  • रोमन साम्राज्य 27 ई.पू.- 476 (पश्चिम)
  • ईसाई धर्म 1 -
  • इस्लाम 610
  • मंगोल साम्राज्य 1206 - 1370
  • मैग्ना कार्टा 1215
  • काली मौत 1348 - 1350
  • तुर्क साम्राज्य 1299 - 1929
  • पुनर्जागरण 14वीं शताब्दी - 17वीं शताब्दी
  • अमेरिकी महाद्वीप की खोज 1492
  • स्पैनिश साम्राज्य 1516 - 1 700
  • उपनिवेशवाद 15वीं शताब्दी - 20वीं शताब्दी
  • प्रोटेस्टैंट आन्दोलन 16वीं शताब्दी
  • सप्तवर्षीय युद्ध (फ्रांस और इंग्लैड के बीच सात साल का युद्ध 1754 - 1763)
  • अमेरिका की क्रान्ति 1775 - 1783
  • फ्रांस की क्रांति 1789
  • औद्योगिक क्रांति 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तथा 19वीं शताब्दी के पूर्वार्ध
  • अमेरिका का गृहयुद्ध 1861 - 1865
  • रूस की क्रांति 1905
  • प्रथम विश्वयुद्ध 1914 - 1918
  • द्वितीय विश्वयुद्ध 1939 - 1945
  • शीतयुद्ध 1945 - 1991
  • चन्द्रमा पर मानव 1969
  • सोवियत संघ का विघटन 1991
  • दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद की समाप्ति 1994
  • वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले 9/11, 2001
  • हिंद महासागर में सुनामी 2004
  • फुकुशिमा दाइची परमाणु दुर्घटना 2011

इतिहासकार :-

मुख्य लेख :- इतिहासकार

इतिहासकार पिछली घटनाओं की जानकारी एकत्र करते हैं, इकट्ठा करते हैं, व्यवस्थित करते हैं और प्रस्तुत करते हैं। वे इस जानकारी को पुरातात्विक साक्ष्य के माध्यम से खोजते हैं, जो भूतकाल में पाचीन स्रोतों जैसे पाण्डुलिपि, शिलालेख आदि से लिये गये है और लिखे गए होते हैं। जैसे जगह के नाम, उनकी विचारधारा आवास, वयवसथा, सामाजिक संस्था, सामाजिक उत्थान और भाषा आदि।

इतिहासकारों की सूची में, इतिहासकारों को उस ऐतिहासिक काल के क्रम में सामूहीकृत किया जा सकता है, जिसमें वे लिख रहे थे, जो जरूरी नहीं कि वह अवधि, जिस अवधि में वे विशेषीकृत थे या निपुण थे क्रॉनिकल्स और एनलिस्ट, हालांकि वे सही अर्थों में इतिहासकार नहीं हैं, उन्हें भी अक्सर शामिल किया जाता है।

छद्मइतिहास :-

मुख्य लेख :- छद्मइतिहास

छद्मइतिहास उन लेखों/रचनाओं के लिये प्रयुक्त किया जाता है जिनकी सामग्री की प्रकृति 'इतिहास जैसी' होती है किन्तु वे इतिहास-लेखन की मानक विधियों से मेल नहीं खाती। इसलिये उनके द्वारा दिये गये निष्कर्ष भ्रामक एवं अविश्वसनीय बन जाते हैं। प्राय: राष्ट्रीय, राजनैतिक, सैनिक, एवं धार्मिक विषयों के सम्बन्ध में नये एवं विवादित और काल्पनिक तथ्यों पर आधारित इतिहास को छद्मइतिहास की श्रेणी में रखा जाता है।

प्रागैतिहास :-

मुख्य लेख :- प्रागैतिहासिक काल

मानव सभ्यता का इतिहास वस्तुत: मानव के विकास का इतिहास है, पर यह प्रश्न सदा विवादग्रस्त रहा है कि आदि मनव और उसकी सभ्यता का विकास कब और कहाँ हुआ। इतिहास के इसी अध्ययन को प्रागैतिहास कहते हैं। यानि इतिहास से पूर्व का इतिहास। प्रागैतिहासिक काल की मानव सभ्यता को ४ भागों में बाँटा गया है।

प्राचीनतम सभ्यताएँ :-

  • आदिम पाषाण काल
  • पूर्व पाषाण काल
  • उत्तर पाषाण काल
  • धातु काल

असभ्यता से अर्धसभ्यता, तथा अर्धसभ्यता से सभ्यता के प्रथम सोपान तक हज़ारों सालों की दूरी तय की गई होगी। लेकिन विश्व में किस समय किस तरह से ये सभ्यताएँ विकसित हुईं इसकी कोई जानकारी आज नहीं मिलती है। हाँ इतना अवश्य मालूम हो सका है कि प्राचीन विश्व की सभी सभ्यताएँ नदियों की घाटियों में ही उदित हुईं और फली फूलीं। दजला-फ़रात की घाटी में सुमेर सभ्यता, बाबिली सभ्यता, तथा असीरियन सभ्यता, नील की घाटी में प्राचीन मिस्र की सभ्यता

सम्राट अशोक (जीवनी) | Samrat Ashok Biography in Hindi

July 12, 2026 0 Comments

 

Samrat Ashok Biography in Hindi


सम्राट अशोक (जीवनी)

प्राचीन समय के सबसे प्राचीन वंश मौर्य वंश के तीसरे राज्य अशोक मौर्य विश्वप्रसिद और सबसे शक्तिशाली राजाओं में से एक थे. सम्राट मौर्य ने 269 से 232 ई.पू तक शासन किया था. मौर्य वंश का यह राजा ही एक ऐसा राजा था जिसने अखंड भारत पर राज किया था. भारत में मौर्य वंश की नींव रखने वाले इस राजा ने भारत के उत्तर में हिन्दुकुश से लेकर गोदावरी नदी तक राज्य का विस्तार किया था इसके साथ ही उनका राज्य बांग्लादेश से लेकर पश्चिम में अफगानिस्तान और ईरान तक राज्य विस्तार था. सम्राट अशोक एक महान राजा होने के साथ धार्मिक सहिष्णु भी थे. वे बौद्ध धर्म के अनुयायी थे.https://www.historyknowledgefree.com/2022/08/samrat-ashok-biography-in-hindi.html

सम्राट अशोक का जीवन परिचय :-

  • नाम :-                 सम्राट अशोक
  • जन्म और स्थान :- 304 ई. पू पाटलिपुत्र
  • शासन का समय :- 269 ई.पू से 232 ई.पू
  • पहचान :-                 महान राजा के रूप में
  • पत्नी का नाम  :-         देवी, कारुवाकी, पद्मावती, तिष्यरक्षिता
  • पिता एवं माता :- बिन्दुसार एवं शुभाद्रंगी
  • मृत्यु :-                 232 ई पु

सम्राट अशोक (ईसा पूर्व 304 से ईसा पूर्व 232) विश्वप्रसिद्ध एवं शक्तिशाली भारतीय मौर्य राजवंश के महान गड़रिया सम्राट थे। अशोक बौद्ध धर्म के सबसे प्रतापी राजा थे। सम्राट अशोक का पूरा नाम देवानांप्रिय अशोक (राजा प्रियदर्शी देवताओं का प्रिय) था। उनका राजकाल ईसा पूर्व 269 से, 232 प्राचीन भारत में था। मौर्य राजवंश के चक्रवर्ती सम्राट अशोक राज्य का मौर्य साम्राज्य उत्तर में हिन्दुकुश, तक्षशिला की श्रेणियों से लेकर दक्षिण में गोदावरी नदी, सुवर्णगिरी पहाड़ी के दक्षिण तथा मैसूर तक तथा पूर्व में बांग्लादेश, पाटलीपुत्र से पश्चिम में अफ़गानिस्तान, ईरान, बलूचिस्तान तक पहुँच गया था। सम्राट अशोक का साम्राज्य आज का सम्पूर्ण भारत, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, म्यान्मार के अधिकांश भूभाग पर था, यह विशाल साम्राज्य उस समय तक से आज तक का सबसे बड़ा भारतीय साम्राज्य रहा है। चक्रवर्ती सम्राट अशोक विश्व के सभी महान एवं शक्तिशाली सम्राटों एवं राजाओं की पंक्तियों में हमेशा शीर्ष स्थान पर ही रहे हैं। सम्राट अशोक ही भारत के सबसे शक्तिशाली एवं महान सम्राट है। सम्राट अशोक को 'चक्रवर्ती सम्राट अशोक' कहा जाता है, जिसका अर्थ है - 'सम्राटों के सम्राट', और यह स्थान भारत में केवल सम्राट अशोक को मिला है। सम्राट अशोक को अपने विस्तृत साम्राज्य से बेहतर कुशल प्रशासन तथा बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए भी जाना जाता है।


एक चीनी यात्री ह्वेन त्सांग और फ़ाहियान की (जीवनी) और उसका प्राचीन भारत का सफ़र।

July 12, 2026 0 Comments

 

एक चीनी यात्री ह्वेन त्सांग और फ़ाहियान  की (जीवनी)

एक चीनी यात्री ह्वेन त्सांग और फ़ाहियान  की (जीवनी) और उसका प्राचीन भारत का सफ़र।



(Biography) of a Chinese traveler Hiuen Tsang and Fahien and their journey to ancient India.

ह्वेन त्सांग :-

ह्वेन त्सांग (चीनी: 玄奘; pinyin: Xuán-Zàng; Wade-Giles: Hsüan-Tsang) एक प्रसिद्ध चीनी बौद्ध भिक्षु था। वह हर्षवर्द्धन के शासन काल में भारत आया था। वह भारत में 15 वर्षों तक रहा। उसने अपनी पुस्तक सी-यू-की में अपनी यात्रा तथा तत्कालीन भारत का विवरण दिया है। उसके वर्णनों से हर्षकालीन भारत की सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक तथा सांस्कृतिक अवस्था का परिचय मिलता है।

Atlantis City (अटलांटिस)

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Atlantis City

अटलांटिस

कहानी एक ऐसे द्वीप की जिसकी सभ्यता हजारों साल आगे थी। कहा जाता है कि वहा देवी देवता निवास करते थे। तो आइए आज जानते है। दुनियां के सबसे प्राचीन और रहस्यमई शहर अटलांटिस के बारे में।

आज से लगभग 2300 वर्ष पेहेले एक मशहूर ग्रीक फिलोसोफर प्लेटो ने अटलांटिस के बारे में कुछ लिखा था। उनके अनुसार ये शहर आज से तकरीबन 11300 साल पहले अस्थित्व में था और एक ही दिन में वो पूरा का पूरा शहर पानी में समा गया। ये शहर बेहद खूबसूरत उन्नत विकसित और अपने समय से कई गुना आगे चल राहा था। कहा जाता है की ये शहर इतना खूबसूरत था की लगता था की स्वर्ग जमीन पर उतर आया हो। ओर कहा जाता है की देवी देवता भी यहां निवास करते थे। ये शहर दरहसल एक द्वीप था जो चारो ओर से पानी से घिरा हुआ था।


यह के लोग आत्म निर्भर थे। ओर मुख ता खेती करते थे। ओर वो अच्छे आर्किटेक्ट भी थे जो एक से एक खूबसूरत इमारतों का निर्माण करते थे। यह इमारत काले और लाल पत्थर से बनाई जाती थी। साथ ही ये लोग सभी तरह के धातु के बारे मे भी जानते थे। ओर उनका इस्तीमल भी करते थे इसी बात से आप समज सकते है की वो कितने उन्नत थे।


कहा ये भी जाता है की यहा के लोग। ऊपर आकाश से यानी की रेडियम तारा मंडल से आज से करीबन 50000 साल पहले धरती पर आए थे। ओर वो आज के इंसानों से गई ज्यादा लंबे गोरे और खूबसूरत थे। जिनके पास कुछ चमत्कारी शक्तियां भी थी। वो मौसम और ज्वाला मुखी को भी नियंत्रित कर सकते थे । ओर उनकी ओसत उम्र 800/1000 साल की होती थीं। कहा जाता है की उनके पास एक ऐसा यंत्र भी था जिक्सी मदत से वो टाइम और स्पेस को भी नियंत्रित कर सकते थे ।

मान्यताओं के अनुसार इस भव्य शहर का निर्माण पोसायडन ने किया था । जो ग्रीक मैथोलॉजी में समुद्र के देवता माने जाते हैं। ओसायडों एक बार किसी एक बोहोत बड़े द्वीप के खोज में थे तभी उन्हें  एक द्वीप मिला जहा बोहोत खूबसूरत लोग रहते थे । वहा एक खूबसूरत महिला भी रहती थीं जिसका नाम क्लिटो था और। पोसायडन का दिल उस महिला पर आगया। ओर उन्होंने उस बंजर पड़े द्वीप में एक भव्य शहर का निर्माण कर दिया। ये शहर क्लिटो के लिऐ बनाया गया था और उसका नाम अटलांटस रखा गया।

इसके बाद पोसायडन को क्लिटो पर शक होने लगा और उसे दुनियां से दूर रखने के लिऐ पोसायडन ने क्लिटो को एक पहाड़ पे कैद करके रखा था। जिसका नाम द हिल ऑफ क्लिटो पड़ा।

आज के समय में वेगियानिको के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है की इस शहर की लोकेशन कहा हो सख्ती है।

लेखों के अनुसार ये शहर किसी बड़ी प्राकृतिक दुर्घटना का शिकार बना था जैसे की भूकंप सुनामी और ज्वाला मुखी के विस्फोट। 

ओर कुछ मान्यताएं एसी भी है की ये शहर पोसायडन के गुस्से का शिकार बना था। या उसने अपनी प्रेमिका क्लिटो को हमेशा के लिऐ अपने पास रखने के लिऐ पूरे शहर को ही पानी के अंदर समा लिया था।


आज भी दुनियां भर के आर्कियालोजिस्ट ओर खोजी इस शहर की खोज में लगे हुए है कइयों ने तो अपनी पूरी जिंदगी लगा दी इस शहर के रहस्य को उजागर करने में। कहा जाता है की आज भी ये शहर धरती के किसी कोने में या समंदर की गहराईयों में दफन है

Chernobyl Nuclear Disaster in Hindi

July 12, 2026 0 Comments

 

Chernobyl Nuclear Disaster in Hindi


हादसे की वो रात।

दिन 26 अप्रैल 1986 समय रात के 1:23 मिनट  In Field Experiment Vladimir Ilyich Lenin Nuclear Power Plant में स्थित रिऐक्टर नंबर 4 की 500 टन वजन वाली सेफ्टी कैप के परखच्चे उड़ा देती हैं।

रीएक्टर नंबर 4 में नाईट शिफ्ट कर रहे इंजिनियर सासा यूचेन के अनुसार इस न्यूक्लियर पावर प्लांट की कंक्रीट की बनी मोटी मोटी दीवारे किसी पिघले हुए रबर की तरह लटक रही थीं । 2004 में दिए गए the गार्डियन के इंटरव्यू में वो ऊस भयावह रात को याद करते हुये वो केहेते है कि वहा कोई छत नही बची थी उपर बस आकाश दिख राहा था तारो से भरा हुवा नीला आकाश रिऍक्टर से निकलने वाली रेडिएशन की नीली लेझर बिम आकाश को चीर्ते हुऐ ऊपर आसमान में जा रही थीं।


इतिहास में ऐसा पहलीबार ऐसा हुवा था कि आम लोग किसी न्यूक्लियर रिएक्टर से निकलने वाली रेडिएशन की आकाश को चीरते हुऐ लेसर बीम को अपनी खुली आखोसे देख रहे थे।
त्रासदी को छुपाने के प्रयास।

इस त्रासदी को छुपाने का हर संभव प्रयास किया गया लेकिन ये तबाही इतनी बड़े पैमाने पर हुई थीं कि इसके परिणाम और विवादो से निपटने के लिऐ जल्दीसे एक विशाल और रिस्पॉन्सिव टीम का गठन कर दिया गया। अधिकारियों ने जल्द बाजी में पूरी की पूरी आर्मी खड़ी कर डाली । जिसमे फायर फाइटर्स पायलट खान में काम करने वाले मज़दूर  और स्थानीय लोग शामिल थे।

इन लोगो का सब से पहे ला काम था न्यूक्लीयर प्लांट के आस पास पड़े रेडिएशन युक्त मलबे को साफ करना। बड़े पैमाने पर शुद्धिकरण करना , सड़के बनाना और रेडिएशन से दूषित हो चुकी हर उस चीज को नष्ट करना। जैसे कई सो इमारतें मिलो मिल फैले जंगल हजारों उपकरण मशीन यहां तक कि जानवर भी । चाहे वो घरेलू जानवर हो या जंगली। माउंट एवरेस्ट चढ़ने जैसा ये सफाई का ये विशाल अभियान अगले 3 सालो तक चलने वाला था । लेकिन इस त्रासदी के बाद चारणोबील में काम करने वाली हजारों लोगो कि जान खतरेमे पढ़ने वाली थीं । जहा पर इन में से अधिकतर वर्कर आपने अधिकारियों के सीधे आदेश पर ये जान लेवा काम करने पर मजबूर थे तो वही हजारों वर्कर्स कुछ ऐसे भी थे जो अपने देश के लिऐ खुद चलकर चारणोबायल आए थे । अपनी जिंदगी खतरें में डाल कर दुनियां का सबसे खतनार सफाई का काम करने वाले इन लोगो को नाम दिया गया था Liquidators