Chernobyl Nuclear Disaster in Hindi
हादसे की वो रात।
दिन 26 अप्रैल 1986 समय रात के 1:23 मिनट In Field Experiment Vladimir Ilyich Lenin Nuclear Power Plant में स्थित रिऐक्टर नंबर 4 की 500 टन वजन वाली सेफ्टी कैप के परखच्चे उड़ा देती हैं।
रीएक्टर नंबर 4 में नाईट शिफ्ट कर रहे इंजिनियर सासा यूचेन के अनुसार इस न्यूक्लियर पावर प्लांट की कंक्रीट की बनी मोटी मोटी दीवारे किसी पिघले हुए रबर की तरह लटक रही थीं । 2004 में दिए गए the गार्डियन के इंटरव्यू में वो ऊस भयावह रात को याद करते हुये वो केहेते है कि वहा कोई छत नही बची थी उपर बस आकाश दिख राहा था तारो से भरा हुवा नीला आकाश रिऍक्टर से निकलने वाली रेडिएशन की नीली लेझर बिम आकाश को चीर्ते हुऐ ऊपर आसमान में जा रही थीं।
इतिहास में ऐसा पहलीबार ऐसा हुवा था कि आम लोग किसी न्यूक्लियर रिएक्टर से निकलने वाली रेडिएशन की आकाश को चीरते हुऐ लेसर बीम को अपनी खुली आखोसे देख रहे थे।
त्रासदी को छुपाने के प्रयास।
इस त्रासदी को छुपाने का हर संभव प्रयास किया गया लेकिन ये तबाही इतनी बड़े पैमाने पर हुई थीं कि इसके परिणाम और विवादो से निपटने के लिऐ जल्दीसे एक विशाल और रिस्पॉन्सिव टीम का गठन कर दिया गया। अधिकारियों ने जल्द बाजी में पूरी की पूरी आर्मी खड़ी कर डाली । जिसमे फायर फाइटर्स पायलट खान में काम करने वाले मज़दूर और स्थानीय लोग शामिल थे।
इन लोगो का सब से पहे ला काम था न्यूक्लीयर प्लांट के आस पास पड़े रेडिएशन युक्त मलबे को साफ करना। बड़े पैमाने पर शुद्धिकरण करना , सड़के बनाना और रेडिएशन से दूषित हो चुकी हर उस चीज को नष्ट करना। जैसे कई सो इमारतें मिलो मिल फैले जंगल हजारों उपकरण मशीन यहां तक कि जानवर भी । चाहे वो घरेलू जानवर हो या जंगली। माउंट एवरेस्ट चढ़ने जैसा ये सफाई का ये विशाल अभियान अगले 3 सालो तक चलने वाला था । लेकिन इस त्रासदी के बाद चारणोबील में काम करने वाली हजारों लोगो कि जान खतरेमे पढ़ने वाली थीं । जहा पर इन में से अधिकतर वर्कर आपने अधिकारियों के सीधे आदेश पर ये जान लेवा काम करने पर मजबूर थे तो वही हजारों वर्कर्स कुछ ऐसे भी थे जो अपने देश के लिऐ खुद चलकर चारणोबायल आए थे । अपनी जिंदगी खतरें में डाल कर दुनियां का सबसे खतनार सफाई का काम करने वाले इन लोगो को नाम दिया गया था Liquidators
Liquidators
लिक्विडेटर्स ये एक रशियन शब्द लिक्वि दातोर से बना है जिसका मतलब होता है किसी हादसे के परिणामों को नष्ट करना।
चरणों बिल की सफाई करने का पेहेला फेस रिएक्टर नंबर 4 में हुए धमाके के अगले दिन यानी कि 27 अप्रैल 1986 कि ही सुभा से शुरू हो गया था।
और इस फेस में सबसे पहले चरणों बिल में रहने वाले और पास के ही शहर क्रिप्यात को पूरी तरह से खाली करने और लोगो को जितना हो सके उतना हादसे की जगह से दूर ले जानें से शुरू हुवा।
फायर फाइटर।
धमाके के बाद सबसे पहले हादसे की जगह पर पोहोचने वाले सबसे पहले लिक्विडेटरमें चारणोबिल प्लांट के फायर फाइटर थे। जिनको ये बताया गया था कि रिएक्टर नंबर 3 के नीचे बिजली के तारों में शॉर्ट सर्किट होने के कारण आग लग गई है। इस लिऐ दुर्भाग्य वर्ष इन फायर फाइटर ने रेडिएशन से बचने के लिऐ कोई जरूरी सेफ्टी किट नहीं पहनी हुई थीं।
पर फिर भी छत में लगी आग पर काबू पाने के बाद जब वो दीवार फांद के खंडर हो चुके रिएक्टर हॉल के ऊपर चढ़ते है तो इनकी आंखों के सामने रिएक्टर की कोर एक भबगते हुए किसी ज्योला मुखी के जैसी जल रही थीं। आंखे चुंधिया देने वाली इस लाल रोशनी का कारण कोर के अंदर 2000% पर जल रहे ग्रेफाइट था।
ये अग्नि शमन कर्म चारी रेडिएशन के जिस सम्पर्क में आए थे वो इरोशिमा और नागासाकी में गिराए गए परमाणु बम से भी कई हजार गुना ज्यादा था।
चरणों बिल न्यूक्लियर हादसे के अगले दिन कुछ मिलिट्री यूनिट्स भी वहा पोहोच चुकी थीं ।
सरके बोंदरोची आगे चलके अपने बयान में कहते है, एक्सीडेंट के बाद का पहला दिन बोहोत मुश्किल था क्या करना है किसीको कुछ समझ नहीं आ राहा था। और क्रिप्यात गांव के लोगों को भी इसके बारे में कुछ बताया नहीं गया था। इसीलिए गांव के औरते बचे बूढ़े जवान सब बे फिकर हो कर इधर उधर घूम रहे थे और अपनी रोज मराती कामों में लगे हुए थे।
लोगों को हादसे की जगह से हटाने का अभियान।
चारणोबिल का ये शुरुवाती सफ़र क्रिप्यात गांव को खाली कराने से लेकर रिएक्टर के चारो तरफ रेडिएशन को दबाने के लिऐ विशाल तय खाने बनाने तक चला जो कि उस वक्त उक्त 1986 के नवंबर को खत्म हुवा। यानी कि पूरे 7 महीने
इस फेस में काम करने वाले लिक्वडेटर्स कि संख्या लाखों में थी । इन्मेसे कुछ को रेडिएशन का पुरा सच ना बताकर ही काम करने के लिऐ चारणोनिल लाया गया था जिनको सबसे खतरनाक काम करना था।
जैसे कि रेडिएशन से दूषित हो चुकी हर एक चीज का शुद्धिकरण करना और दूषित हो चुकी हर एक चीज को नष्ट करना शामिल था।
अग्नि शमन कर्मचारियों को चारणोबिल में लगी आग पर काबू पाने में 10 दिन का समय लग गया।
और रिएक्टर के अन्दर लगी आग पर काबू पाना अभी बाकी था।
वर्ल्ड न्यूक्लियर एसोसिएशन के अनुसार इस 10 दिनों के दौरान चारणोबिल के आस पास इतनी बड़ी मात्रा में रेडिएशन मौजूद था जितना कि मानव इतिहास में ना कभी देखा गया और ना ही सुना गया।
फायर फाइटर्स पायलट।
चारणोबिल के इस समूहमे एक अत्यंत महत्वपूर्ण एक दूसरा समूह भी था हेलीकॉप्टर पायलट का समूह इन पायलट का काम था बर्बाद हो चुके इन रिएक्टर के जितना पास हो सके उतना पास उड़ते हुए रेडिएशन मारक पदार्थ जैसे कि लेड बोरोन क्ले और रेत का ऊपर से छिड़काव करना।
रिएक्टर में लगी आग को बुझाने के लिऐ इन हजारों हेलीकॉप्टर पायलट को रोजाना 5000 किलो सामग्री रिएक्टर पर गिराने के आदेश दिए गए थे ।
इसे पहले की रेडिएशन आस पास के ब्लैक सी और नदियों में जा मिलता क्यू कि अगर ऐसा होता। तो इस त्रासदी से होने वाली तबाही का अंदाजा भी लगा पाना लगभग ना मुंकिन था इसलिए इसे रोकने का हर वो संभव प्रयास किया जा रहा था।
खान मजदूरों का इस्तिमाल।
रिएक्टर के नीचे खुदाई करके रिएक्टर की आग पर काबू पाने और न्यूक्लियर मेल्ट डाउन को रोकने के लिऐ 400 खान मजदूरों को भी चारणोबिल लाया गया था । रिएक्टर के नीचे 551 फिट लंबी सुरंग खोदने का ये जानलेवा काम हादसे के 24 दिन बाद खत्म कर लेते है । रिएक्टर के नीचे जहा खुदाई का काम चल राहा था वहा तापमान 50% से भी ज्यादा था जिसके कारण खान में काम करने वाले मजदूरों को लगभग नग्न अवस्थामे काम करना पड़ता था।
मैन ऑफ रु।
लिक्वी डेटर्स का एक ओर समूह भी था जिसे नाम दिया गया था मैन ऑन रु । जिसे ये काम दिया गया था कि रिएक्टर नंबर 3 पे पड़े मलबे को साफ करने का काम कर रहा था। शुरूवात में इस काम को करने के लिऐ उस वक्त के सबसे आधुनिक नासा के लूनर मिशन की भी मदत ली गई थीं मगर दुर्भाग्य वर्ष रेडिएशन इतना ज्यादा था कि उसके संपर्क में आते ही हर इलेक्ट्रॉनिक्स की चीज नष्ट हो जाति या पूरी तरह से खराब हो जाती इसलिए मजबूरन फिर ये सफाई का जान लेवा काम इन लिक्विडेटर्स को अपने हतोसे ही करना पडा पर रेडिशन इतनी बड़ी मात्रा में मौजूद था कि उन लोगों को वो कचरा साफ करने के लिऐ वहा पे बस कुछ सेकंड्स ही मिलते थे। जिसके कारण ये तय किया गया कि एक बार मैं भाग के आपको जाना है और एक बार मैं फावड़े में जितना हो सके उतना खचरा उठाके उसे नीचे गिरके वापस भाग के आना है और ये करने के लिए उन्हें सिर्फ एक की मोका और कुछ सेकंड्स मिलते। अगर उससे ज्यादा वो रेडिशन की चपेट मै आए तो उनकी वही मौत तय थीं।
इनको और एक काम और भी करना था बंजर और बेजान हो चुके हजारों मील में फैले जंगलो को नष्ट कर्णा क्यू कि रेडिएशन की मात्रा इस हद तक थी कि देवदार के हजारों पेड़ भी इस रेडिएशन के चलते मर चुके थे और इस बेजान पड़े जंगलों को नाम दिया गया ( द रेड फॉरेस्ट )
महिला सफाई कर्म चारियो की भूमिका।
कई हजार महिला कर्म चारियो को भी चरणों बिल लाया गया था जिनका काम था हर घर में जाकर हर वो खाने पीने की चीजों को नष्ट करना जिससे किसी भी तरह की आने वाली माहामारी को रोका जा सके और इन सब से से लेकर जानवरों को मारने तक का काम भी इन्हे करना था।
न्यूक्लियर रिएक्टर से फैले मलबे को हटाने और सड़के साफ कराने से लेकर हर वो तरह का काम इन लिक्विडेटर को करना पड़ता था। वो सफ़र में जाते समय रास्ते पर एक चिप चिपे पदार्थ का छिड़काव करते जाते थे ताकि रेडिएशन को रोका जा सके सभी तरह की सेफ्टी लगाने के बाद भी जो गाडियां इन कामों में इस्तीमाल की जाति उन्हें एक हफ्ते के अंदर ही जमीन के नीचे गढ़ा खोदकर हमेशा के लिऐ दबा दिया जाता इसी बात से आप अंदाजा लगा सकते है की ये काम कितना खतरनाक था।
तय खाना नुमा संरचना और एक विशाल आवरण रेडिएशन को बाहर निकलने से रोकने के लिऐ।
मालबेको दबाने के लिऐ चरणों बिल रिएक्टर के चारो तरफ तय खाना नुमा संरचना बनाने का काम जून 1986 में शुरू हुवा ओर 206 दिनों तक चला । इस निर्माण की प्रक्रिया को 8 चरणों में पूरा किया गया । जिसके लिऐ हजारों मजदूरों के साथ साथ 11 करोड़ 23 लाख और 35 हजार क्यू बिक टन कंक्रीट और 7 हजार 300 टन वजन के मेटल फ्रेम के ढांचे का इस्तिमाल किया गया।
चरणों बिल की इस महा त्रासदी से मची न्यूक्लियर तबाही को रोकने और गंदगी को साफ कराने के लिऐ चलाए गए इस अभियान कितना महा विशाल था इस बाद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सक्ता है कि इस अभियान में इस्तिमल हुए लिक्विडेटर की सही सही संख्या आज तर किसीको पता नहीं।
एलेक्स जेंडर फेडितो एक ऐसे लिक्विडेटर है जिन्होंने इस अभियान में हिस्सा लिया ओर वो आज भी जिन्दा है। वो अपने दिए हुए एक इंटरव्यू में कहते है। SOMEBODY HAD TO DO THIS कि किसी को तो ये करना ही था।
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